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सर्वकोश
“जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं” — कबीर

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कबीर के दोहे

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं प्रेम गली अति साँकरी, तामें दो न समाहिं

अर्थ

जब तक अहंकार था, तब तक हरि नहीं मिले; अहंकार मिटा तो हरि मिल गए। प्रेम की गली इतनी सँकरी है कि उसमें 'मैं' और प्रभु दोनों नहीं समा सकते।

रोमन अक्षरों में

jab main tha tab hari nahin, ab hari hain main naahin prem gali ati saankri, taamen do na samaahin

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