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सर्वकोश
“जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान” — कबीर

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कबीर के दोहे

जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान जैसे खाल लुहार की, साँस लेत बिनु प्रान

अर्थ

जिस हृदय में प्रेम नहीं, उसे श्मशान समझो। वह लुहार की धौंकनी जैसा है, जो साँस तो लेती है पर उसमें प्राण नहीं होते।

रोमन अक्षरों में

ja ghat prem na sanchrai, so ghat jaan masaan jaise khaal luhaar ki, saans let binu praan

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