कबीर के दोहे
हीरा तहाँ न खोलिए, जहाँ कुंजड़ों की हाट बाँधो चुप की पोटरी, लागहु अपनी बाट
अर्थ
जहाँ सब्ज़ी बेचने वालों का बाज़ार हो, वहाँ हीरा मत खोलो। जहाँ ज्ञान की कदर न हो, वहाँ चुप रहकर अपनी राह चलो।
रोमन अक्षरों में
hira tahaan na kholie, jahaan kunjdon ki haat baandho chup ki potri, laaghu apni baat
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