कबीर के दोहे
दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट पूरा किया बिसाहुणाँ, बहुरि न आँवौं हट्ट
अर्थ
गुरु ने तेल से भरा दीपक और न घटने वाली बाती दे दी। अब जीवन का सौदा पूरा हो गया, संसार के बाज़ार में फिर लौटकर नहीं आऊँगा।
रोमन अक्षरों में
dipak diya tel bhari, baati dai aghatt pura kiya bisaahunaan, bahuri na aanvaun hatt
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