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सर्वकोश
“चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय” — कबीर

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कबीर के दोहे

चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय

अर्थ

चलती चक्की देखकर कबीर रो पड़े, क्योंकि दो पाटों के बीच कोई दाना साबुत नहीं बचता। वैसे ही जन्म-मरण के चक्र में सब पिस जाते हैं।

रोमन अक्षरों में

chalti chakki dekh ke, diya kabira roy do paatan ke bich men, saabut bacha na koy

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