कबीर के दोहे
चकवी बिछुटी रैणि की, आइ मिली परभाति जे जन बिछुटे राम सूँ, ते दिन मिले न राति
अर्थ
रात में बिछुड़ी चकवी सुबह अपने साथी से मिल जाती है, पर जो लोग राम से बिछुड़ गए, वे न दिन में मिलते हैं न रात में।
रोमन अक्षरों में
chakvi bichhuti raini ki, aai mili parbhaati je jan bichhute raam sun, te din mile na raati
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