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सर्वकोश
“अँखड़ियाँ झाईं पड़ी, पंथ निहारि निहारि” — कबीर

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कबीर के दोहे

अँखड़ियाँ झाईं पड़ी, पंथ निहारि निहारि जीभड़ियाँ छाला पड़्या, राम पुकारि पुकारि

अर्थ

प्रभु की राह देखते-देखते आँखों के आगे अँधेरा छा गया और राम-राम पुकारते-पुकारते जीभ पर छाले पड़ गए।

रोमन अक्षरों में

ankhdiyaan jhaain padi, panth nihaari nihaari jibhdiyaan chhaala padya, raam pukaari pukaari

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