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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 421 में से

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पृष्ठ 49

पूर्वार्ध तीसरा अध्याय
वयस्वन्तो वयस्कृत १७ सहस्वन्तः सहस्कृतम्.
अग्ने सपत्नदम्भनमदब्धासो अदाभ्यम्.
चित्रावसो स्वस्ति ते पारमशीय.. (१८)
हे अग्नि! आप प्रकाशमान व धनवान हैं. आप की कृपा से यजमान सौ वर्ष की
आयु पाते हैं. आप आयुष्मान हैं. आप हमें भी आयुष्मान बनाने की कृपा कीजिए.
आप शक्तिमान हैं. हमें भी शक्तिमान बनाने की कृपा कीजिए. आप अदम्य हैं. आप
हमें पत्नी सहित सौ वर्षों तक प्रकाशित रखने की कृपा कीजिए. आप विलक्षण हैं.
आप हमें कल्याण के लिए अपनी शरण में रखने की कृपा कीजिए. (१८)
सं त्वमग्ने सूर्यस्य वर्चसागथाः समृषीणा १७ स्तुतेन.
सं प्रियेण धाम्ना समहमायुषा सं वर्चसा सं प्रजया स १७ रायस्पोषेण गमिषीय.. (१९)
हे अग्नि! आप सूर्य से प्रभावित हैं. आप ऋषियों की स्तुतियों से युक्त हैं.आप
आहुतिमय हैं. आप अपने प्रिय धाम से आयु, वर्चस्व, संतान, धनधान्य पोषण सहित
पधारने की कृपा कीजिए. (१९)
अन्धस्थान्धो वो भक्षीय महस्थ महो वो भक्षीयोर्जस्थोर्जं वो भक्षीय रायस्पोषस्थ
रायस्पोषं वो भक्षीय.. (२०)
हे गौओ! आप अन्न स्वरूपा हैं. आप की कृपा से अन्न हमारे लिए खाने योग्य
होता है. आप रस से युक्त हैं. आप की कृपा से घी, दूध आदि रसीली चीजें खाने
योग्य होती हैं. आप आदरणीया हैं. हमें आदर योग्य बनाने की कृपा कीजिए. आप
धनवती हैं. आप हमें धनी बनाने की कृपा कीजिए. आप बलवती हैं. आप हमें भी
बलवान बनाइए. आप की कृपा से हम पुष्ट हों. (२०)
रेवती रमध्वमस्मिन्योनावस्मिन् गोष्ठेऽस्मिँल्लोकेऽस्मिन् क्षये. इहैव स्त मापगात.. (२१)
हे रेवती ( धन वाली गौओ )! आप यज्ञ के समय यज्ञस्थल पर प्रसन्नता के साथ
रहें. आप दुही जाने से पहले बाड़े में विचरें. आप सदैव यजमान की आंखों में रहें.
आप यहीं निवास कीजिए. आप कहीं मत जाइए. (२१)
स १७ हितासि विश्वरूप्यूर्जामाविश गौपत्येन.
उप त्वाग्ने दिवेदिवे दोषावस्तर्द्धिया वयम्.
नमो भरन्त ऽ एमसि.. (२२)
हे गौओ! आप बहुत रूपों वाली और ऊर्जस्वी ( तेजस्‍वी ) हैं. आप यजमान
को गोपति बनाती हैं. हे अग्नि! आप दिनरात यजमान के पास निवास करते हैं. हम
श्रद्धा से भर कर आप को नमन करते हैं. हम आप के पास आते हैं. (२२)
राजन्तमध्वराणां गोपामृतस्य दीदिविम्. वर्धमान १७ स्वे दमे.. (२३)
यजुर्वेद - ४९