यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 355, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसवां अध्याय
देव सवितः प्र सुव यज्ञं प्र सुव यज्ञपतिं भगाय.
दिव्यो गन्धर्वः केतपूः केतं नः पुनातु वाचस्पतिर्वाचं नः स्वदतु.. (१)
हे सविता देव! आप प्रमुख उत्पादक व यज्ञ के जनक हैं. आप यज्ञपति को
भाग्य प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप दिव्य गंधर्व और पवित्र विचारों वाले हैं.
आप हमारी विचार वाणी को भी पवित्र बनाने की कृपा कीजिए. आप वाणी पति
हैं. आप हमें भी मधुर वचन दीजिए. ( १ )
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो नः प्रचोदयात्.. (२)
हे सविता देव! आप वरेण्य और देवताओं के लिए सौभाग्य धारते हैं. आप
हमारी बुद्धि को भी प्रेरित करने की कृपा कीजिए. ( २ )
विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव. यद्भद्रं तन्न ऽ आ सुव.. (३)
हे सविता देव! आप सब देवों के देव हैं. आप हमारी कमियों को दूर कीजिए.
आप जो भी हमारे लिए भद्र है, उसे लाने की कृपा कीजिए. ( ३ )
विभक्तार थ्४ हवामहे वसोश्चित्रस्य राधसः. सवितारं नृचक्षसम्.. (४)
हे सविता देव! हम आप का आह्वान करते हैं. आप संरक्षक, धनवान, प्रेरक व
सभी को संपत्ति देने वाले हैं. ( ४ )
ब्रह्मणे ब्राह्मणं क्षत्राय राजन्यं मरुद्भ्यो वैश्यं तपसे शूद्रं तमसे तस्करं नारकाय वीरहणं
पाप्मने क्लीब माक्रयाया ऽ अयोगूं कामाय पुँश्चलूमतिक्रुष्टाय मागधम्.. (५)
ब्राह्मण के लिए ब्रह्मज्ञान, क्षत्रिय के लिए रक्षण, वैश्य के लिए पालनपोषण,
शूद्र के लिए सेवा कर्तव्य व उपयुक्त हैं. चोर के लिए अंधकार, नरक के लिए
वीरघातक, नपुंसक के लिए पाप, खरीद के लिए पुरुषार्थी, काम के लिए व्यभिचारी
अच्छी बोलने की शक्ति के लिए प्रमाण देने वाला उपयुक्त होता है. ( ५ )
नृत्ताय सूतं गीताय शैलूषं धर्माय सभाचरं नरिष्ठायै भीमलं नमय रेभ थ्४ हसाय
कारिमानन्दाय स्त्रीषखं प्रमदे कुमारीपुत्रं मेधायै रथकारं धैर्याय तक्षाणम्.. (६)
यजुर्वेद - ३५५