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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 421 में से

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पृष्ठ 353

उत्तरार्ध उनतीसवां अध्याय
हे दुंदुभि! आप पृथ्वी व स्वर्गलोक को गुंजाइए. आप को पूरा जगत् जान व
मान सके. आप देवों व इंद्र देव से प्रेम रखते हैं. आप शत्रुओं को हम से दूर रखने
की कृपा करें. ( ५५ )
आ क्रन्दय बलमोजो न ऽ आधा निष्ठेनिहि दुरिता बाधमानः.
अप प्रोथ दुन्दुभे दुच्छुना ऽ इत ऽ इन्द्रस्य मुष्टिरसि वीडयस्व.. (५६)
हे दुंदुभि! आप की आवाज सुन कर ही शत्रु क्रंदन करने लगे. आप हमें तेजस्वी
बनाइए. आप हमें पापों से दूर कीजिए. आप इंद्र देव की मुट्ठी जैसे मजबूत होइए.
हमारी सेना के पास जो शत्रु आए. आप पूरी तरह उन का नाश कीजिए. ( ५६ )
आमूरज प्रत्यावर्तयेमाः केतुमद्दुन्दुभिर्वावदीति.
समश्वपर्णाश्चरन्ति नो नरोस्माकमिन्द्र रथिनो जयन्तु.. (५७)
हे इंद्र देव! हमारे रथों की विजय पताका फहराइए. हम दुंदुभि बजाते हुए लौटें.
हमारे समर्पित योद्धा घोड़े घूमते हैं. हमारे रथी जीतें, हमारे लोग जीतें. ( ५७ )
आग्नेयः कृष्णग्रीवः सारस्वती मेषी बभ्रुः सौम्यः पौष्णः श्यामः शितिपृष्ठो
बार्हस्पत्यः शिल्पो वैश्वदेव ऽ ऐन्द्रोरुणो मारुतः कल्माष ऽ ऐन्द्राग्नः स १४ हितोधोरामः
सावित्रो वारुणः कृष्ण ऽ एकशितिपात्पेत्वः.. (५८)
काली गरदन वाला पशु अग्नि, मेषी सरस्वती देवी, भूरे रंग का पशु सोम से,
श्याम रंग का पूषा देव से संबंधित है. काली पीठ वाला पशु बृहस्पति देव व शिल्प
बहुत से देवों से लाल रंग का पशु इंद्र देव व चितकबरे पशु मरुद् देव, बलवान
पशु इंद्र और अग्नि, नीचे सफेद रंग वाले सूर्य देव व एक पैर सफेद और शेष काले
अंगों वाले वेगशील पशु वरुण देव से संबंधित हैं. ( ५८ )
अग्नयेनीकवते रोहिताञ्जिरनड्‌वानधोरामौ सावित्रौ पौष्णौ रजतनाभी वैश्वदेवौ पिशङ्गौ
तूपरौ मारुतः कल्माष ऽ आग्नेयः कृष्णोजः सारस्वती मेषी वारुणः पेत्वः.. (५९)
लाल चिह्न वाला वृषभ ज्वाला वाले अग्नि, नीचे स्थान से सफेद रंग वाले दो
पशु सविता देव, चांदी जैसे रंग की नाभि वाले दो पशु पूषा देव, ऊपर पीले रंग के
सींग वाले दो पशु विश्व से व चितकबरा पशु मरुत् देव से संबंधित है. काला अज
अग्नि, मेषी सरस्वती व पतनशील पशु वरुण देव से संबंधित हैं. ( ५९ )
अग्नये गायत्राय त्रिवृते राथन्तरायाष्टकपाल ऽ इन्द्राय त्रैष्टुभाय पञ्चदशाय
बार्हतायैकादशकपालो विश्वेभ्यो देवेभ्यो जागतेभ्यः सप्तदशेभ्यो वैरूपेभ्यो
द्वादशकपालो मित्रावरुणाभ्यामानुष्टुभाभ्यामेकवि १४ शाभ्यां वैराजाभ्यांपयस्या
बृहस्पतये पाङ्क्ताय त्रिणवाय शाक्वराय चरुः सवित्र ऽ औष्णिहाय त्रयस्त्रि १४ शाय
रैवताय द्वादशकपालः प्राजापत्यश्चरुरदित्यै विष्णुपत्न्यै चरुरग्नये वैश्वानराय
यजुर्वेद - ३५३