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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 316, कुल 421 में से

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पृष्ठ 316

उत्तरार्ध पच्चीसवां अध्याय
तान्पूर्वया निविदा हूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम्.
अर्यमणं वरुणं १४ सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत्.. (१६)
हम मित्र देव, भग देव, अदिति देव, दक्ष देव, अर्यमा देव, वरुण देव, अश्विनी
देवों व सरस्वती देवी को निमंत्रित करते हैं. हम उन का आह्वान करते हैं. वे
सौभाग्यदायिनी हैं. वे हम यजमानों का कल्याण करने की कृपा करें. (१६)
तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः.
तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम्.. (१७)
वायु हमारे अनुकूल होने की कृपा करें. वे हमारे लिए ओषधीय गुणों से युक्त
हों. वे हमारे लिए सुखदायी वायु प्रवाहित करने की कृपा करें. माता पृथ्वी, स्वर्गलोक
हमारे व सोम चुआने वाले पत्थर हमारे अनुकूल होने की कृपा करें. आप हमारी
प्रार्थना सुनने की कृपा करें और हमारी प्रार्थना के अनुकूल हमें सुखी बनाएं. (१७)
तमीशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियञ्जिन्वमवसे हूमहे वयम्.
पूषा नो यथा वेदसामसद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये.. (१८)
हम उस परम शक्ति का अपनी रक्षा के लिए आह्वान करते हैं, जिस ने इस जगत्
को स्थिर बनाया, जो शक्ति सभी को वशीभूत करने वाली है. पूषा देव हमारे ज्ञान व
बुद्धि को बढ़ाने की कृपा करें. परम शक्ति एवं पूषा देव का हम अपने कल्याण के
लिए आह्वान करते हैं. (१८)
स्वस्ति न ऽ इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः.
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु.. (१९)
ऐश्वर्यवान इंद्र देव, सर्वज्ञाता पूषा व अनिष्ट नाशक पंखवान गरुड़ इंद्र देव
हमारा कल्याण करने की कृपा करें. बृहस्पति देव व उपर्युक्त सभी देव हमारा
कल्याण करने वाले हों. (१९)
पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभंयावानो विदथेषु जग्मयः.
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा ऽ अवसागमन्निह.. (२०)
मरुद्गण शक्तिशाली व वेगवान घोड़ों वाले हैं. अदिति देवी मरुद्गण की
माता हैं. मरुद्गण सब का कल्याण करने वाले हैं. अग्नि रूपी जीभ व सूर्य रूपी
आंख वाले हैं. वे हमारे लिए सभी देवताओं को साथ ले कर यहां यज्ञ में आने की
कृपा करें. (२०)
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः.
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा १४ सस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायूः.. (२१)
हे यज्ञ रक्षक देवताओ! हम कानों से कल्याणकारी वचन सुनें. हम आंखों से
३१६ - यजुर्वेद