सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 288

उत्तरार्ध बाईसवां अध्याय
देव के लिए स्वाहा. मानवधारी पूजा देव के लिए स्वाहा. त्वष्टा पूजा देव के
लिए स्वाहा. तीव्र पूषा देव के लिए स्वाहा. विविध रूप पूषा देव के लिए स्वाहा.
विष्णु हेतु स्वाहा. भूपति देव हेतु स्वाहा. सब के चित्त में स्थित विष्णु देव हेतु
स्वाहा. (२०)
विश्वो देवस्य नेतुर्मर्तो वुरीत्त सख्यम्.
विश्वो राय ऽ इषुध्यति द्युम्नं वृणीत पुष्यसे स्वाहा.. (२१)
सविता देव संसार के नायक हैं. हम उन की मित्रता व संसार के सारे वैभव पाना
चाहते हैं. हम पुष्टता चाहते हैं. हम स्वर्गलोक चाहते हैं. सविता देव हेतु स्वाहा. (२१)
आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामा राष्ट्रे राजन्यः शूर ऽ इषव्योतिव्याधी महारथो
जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्ध्रिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य
यजमानस्य वीरो जायतां निकामेनिकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो न ऽ ओषधयः
पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम्.. (२२)
हे ब्राह्मण! आप ब्रह्मवर्चस्वी हैं. राष्ट्र में शूरवीर बाणविद्या में निपुण महारथी
क्षत्रिय उत्पन्न हों. तीव्र वेग वाले घोड़े, भार ढोने वाले बैल, दुधारू गाएं लोगों
को मिलें. स्त्रियां चरित्रवती और गुणवती हों. वीर विजयी हों. सभी युवा हों.
अच्छे वक्ता हों. बादल अच्छे बरसें. ओषधियां फलवती हों. योगक्षेम का भी
निर्वाह हो. (२२)
प्राणाय स्वाहापानाय स्वाहा व्यानाय स्वाहा चक्षुषे स्वाहा श्रोत्राय स्वाहा वाचे स्वाहा
मनसे स्वाहा.. (२३)
प्राण को स्वाहा. अपान को स्वाहा. व्यान को स्वाहा. चक्षु को स्वाहा. वाणी
को स्वाहा. मन को स्वाहा. (२३)
प्राच्यै दिशे स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहा दक्षिणायै दिशे स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहा प्रतीच्यै
दिशे स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहोदीच्यै दिशे स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहोर्ध्वायै दिशे
स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहावाच्यै दिशे स्वाहावार्वाच्यै दिशे स्वाहा.. (२४)
पूर्व दिशा के लिए स्वाहा. पश्चिम दिशा के लिए स्वाहा. दक्षिण दिशा के लिए
स्वाहा. ईशान दिशा के लिए स्वाहा. ऊर्ध्व दिशा के लिए स्वाहा. प्रतीच्य दिशा के
लिए स्वाहा. उदीच्य दिशा के लिए स्वाहा. अर्वाच्य दिशा के लिए स्वाहा. अध्वार्य
दिशा के लिए स्वाहा. अर्वाच्य दिशा के लिए स्वाहा. उवाच्य दिशा के लिए स्वाहा.
ऊर्वाच्य दिशा के लिए स्वाहा. उवाच्य दिशा के लिए स्वाहा. (२४)
अद्भ्यः स्वाहा वार्य्यः स्वाहोदकाय स्वाहा तिष्ठन्तीभ्यः स्वाहा स्रवन्तीभ्यः स्वाहा
स्यन्दमानाभ्यः स्वाहा कूप्याभ्यः स्वाहा सूद्याभ्यः स्वाहा धार्याभ्यः स्वाहार्णवाय स्वाहा
२८८ - यजुर्वेद 632/18