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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 287, कुल 421 में से

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पृष्ठ 287

उत्तरार्ध बाईसवां अध्याय
हे अग्नि! आप हवि वहन करते हैं. आप अमर हैं. आप स्वयं प्रज्वलित होते हैं.
आप देवताओं के दूत हैं. आप हितैषी हैं. आप हवि धारण कर के उसे पहुंचाने की
कृपा करें. ( १६ )
अग्निं दूतं पुरो दधे हव्यवाहमुप ब्रुवे. देवाँ २ आ सादयादिह.. (१७)
अग्नि दूत व हव्य वाहक हैं. हम सम्मुख ही उन की स्थापना करते हैं. हम
उन से अनुरोध करते हैं कि वह यहां पधारें व विराजें और हवि को देवताओं
तक पहुंचाएं. ( १७ )
अजीजनो हि पवमान सूर्यं विधारे शक्मना पय:.
गोजरीया र २४ हमाणः पुरन्ध्या.. (१८)
हे अग्नि! आप पवित्र करने वाले हैं. आप ने सूर्य को प्रकटाया. आप जल
धारण करने की सामर्थ्य रखते हैं. आप गौ आदि के लिए जीवन धारण करते हैं.
गौ आदि आप की कृपा से जल ( दूध ) धारती हैं. ( १८ )
विभूर्मात्रा प्रभूः पित्राश्वो ऽ सि हयो ऽ स्यत्यो ऽ सि मयो ऽ स्यर्वा ऽ सि सप्तिरसि
वाज्यसि वृषासि नृमणा ऽ असि.
ययुर्नामासि शिशुर्मामास्यादित्यानां पत्वान्विहि देवा ऽ आशापाला ऽ एतं देवेभ्यो ऽ श्वं
मेधाय प्रोक्षित २४ रक्षतेह रन्तिरिह रमतामिह धृतिरिह स्वधृतिः स्वाहा.. (१९)
हे अग्नि! आप वैभव संपन्न हैं. आप माता हैं. आप पिता हैं. आप अश्व हैं. आप
हम हैं. आप गतिशील हैं. आप मय हैं. आप पराक्रमी हैं. आप सुखदायी हैं. आप नम्र
हैं. आप शिशु हैं. आप रक्षक हैं. आप आदित्यों की तरह अपनी राह पर चलते हैं.
आप दिशापति हैं. आप देवताओं के लिए इस संस्कार संपन्न घोड़े की रक्षा की कृपा
कीजिए. यह यहां प्रसन्नता से रमण करें, रमें. यह यज्ञ को धारें. यह स्वयं धारण
करने की शक्ति वाले हैं. इन के लिए स्वाहा. ( १९ )
काय स्वाहा कस्मै स्वाहा कतमस्मै स्वाहा स्वाहाधिमाधीताय स्वाहा मनः प्रजापतये
स्वाहा चित्तं विज्ञातायादित्यै स्वाहादित्यै मह्यै स्वाहादित्यै सुमृडीकायै स्वाहा सरस्वत्यै
स्वाहा सरस्वत्यै पावकायै स्वाहा सरस्वत्यै बृहत्यै स्वाहा पूष्णे स्वाहा पूष्णे प्रपथ्याय
स्वाहा पूष्णे नरन्धिषाय स्वाहा त्वष्ट्रे स्वाहा त्वष्ट्रे तुरीपाय स्वाहा त्वष्ट्रे पुरुरूपाय स्वाहा
विष्णवे स्वाहा विष्णवे निभूयपाय स्वाहा विष्णवे शिपिविष्टाय स्वाहा.. (२०)
प्रजापति के लिए स्वाहा. सुख हेतु स्वाहा. सर्वश्रेष्ठ के लिए स्वाहा. विद्या
धारण करने हेतु स्वाहा. मन स्वरूप प्रजापति के लिए स्वाहा. चित्त स्वरूप
प्रजापति के लिए स्वाहा. विशिष्ट ज्ञात आदित्य के लिए स्वाहा. मध्यादित्य के
लिए स्वाहा. सुखदायी के लिए स्वाहा. पवित्र सरस्वती देवी के लिए स्वाहा.
विशालवती देवी के लिए स्वाहा. पूषा देव के लिए स्वाहा. श्रेष्ठ पथवाले पूषा
यजुर्वेद - २८७