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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 281, कुल 421 में से

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पृष्ठ 281

उत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय
देवी ऊर्जाहुती दुघे सुदुघेन्द्रे सरस्वत्यश्विना भिषजावतः.
शुक्रं न ज्योति स्तनयोराहुती धत्त ऽ इन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (५२)
सरस्वती देवी और अश्विनीकुमार ऊर्जा वाले, मनोकामना पूरक व रसीले हैं.
दोनों ने इंद्र देव में शुक्र की स्थापना की. बीच के प्रदेश में ज्योति स्थापित की.
अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं.
हमारे लिए धन धारें. धन के इच्छुक यजमान उस के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने
की कृपा करें. ( ५२ )
देवा देवानां भिषजा होताराविन्द्रमश्विना.
वषट्कारैः सरस्वती त्विषिं न हृदये मति १४ होतृभ्यां दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य
व्यन्तु यज.. (५३)
अश्विनीकुमार देवों के देव हैं. वे देवों के चिकित्सक हैं. उन्होंने और सरस्वती
देवी ने इंद्र देव में वषट्कार ( तेज ) व हृदय में बुद्धि की स्थापना की. अश्विनीकुमारों
ने इंद्र देव की आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए
धन धारें. धन के इच्छुक यजमान उस के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा
करें. ( ५३ )
देवीस्तिस्रस्तिस्रो देवीरश्विनेडा सरस्वती.
शूषं न मध्ये नाभ्यामिन्द्राय दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (५४)
सरस्वती आदि तीनों देवियों सहित अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव के मध्य भाग में
नाभि में बल धारण कराया. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की आंखों में दृष्टि की
स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन के इच्छुक यजमान उस
के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा करें. ( ५४ )
देव ऽ इन्द्रो नराश १४ सस्त्रिवरूथः सरस्वत्याश्विभ्यामीयते रथः.
रेतो न रूपममृतं जनित्रमिन्द्राय त्वष्टा दधदिन्द्रियाणि वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु
यज.. (५५)
सरस्वती देवी, त्वष्टा देव तथा अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव के लिए प्रशंसा योग्य
रथ प्रस्तुत किया. इन देवों ने इंद्र देव में वीर्य की स्थापना की. रूप उपजाया.
जननेंद्रिय में उपजाने की शक्ति की स्थापना की. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की
आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन के
इच्छुक यजमान उस के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा करें. ( ५५ )
देवो देवैर्वनस्पतिर्हिरण्यपर्णो अश्विभ्या १५ सरस्वत्या सुपिप्पल ऽ इन्द्राय पच्यते मधु.
ओजो न जूतिर्ऋषभो न भामं वनस्पतिर्नो दधदिन्द्रियाणि वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु
यज.. (५६)
यजुर्वेद - २८१