यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 280, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय
प्रिया धामानि यक्षदग्नेर्होतुः प्रिया धामानि यक्षत् स्वं महिमानमायजतामेज्या ऽ इषः कृणोतु
सो अध्वरा जातवेदा जुषता १४ हविर्होतर्यज.. (४७)
होता ने अग्नि हेतु भलीभांति यज्ञ किया. अग्नि ने कृपा की. अश्विनीकुमारों
को छाग के धाम समर्पित किए. अश्विनीकुमारों को ऋषभ धाम समर्पित किए.
सरस्वती देवी को मेष के धाम समर्पित किए. वरुण देव के प्रिय धाम समर्पित किए.
वनस्पति के प्रियधाम समर्पित किए. घी की हवि पीने वालों के लिए प्रिय धाम
समर्पित किए. अग्नि सर्वज्ञ हैं. महिमाशाली हैं. वे प्रिय हवि का सेवन करें. यजमानों
का कल्याण करें. हे होता गण! आप भी ऐसा ही यज्ञ कीजिए. ( ४७ )
देवं बर्हिः सरस्वती सुदेवमिन्द्रे अश्विना.
तेजो न चक्षुरक्ष्योर्बर्हिषा दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (४८)
सरस्वती देवी ने देव सुदेव इंद्र और अश्विनीकुमारों के लिए कुश का आसन
दिया. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव में तेज की स्थापना की. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव
की आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन
के इच्छुक यजमान उस के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( ४८ )
देवीद्वारो अश्विना भिषजेन्द्रे सरस्वती.
प्राणं न वीर्यं नसि द्वारो दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (४९)
सरस्वती देवी दिव्य द्वार वाली हैं, अश्विनीदेव ने इंद्र देव में प्राण और वीर्य की
स्थापना की. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र
देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन के इच्छुक यजमान उस के लिए
कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा करें. ( ४९ )
देवी उषासावश्विना सुत्रामेन्द्रे सरस्वती.
बलं न वाचमास्य ऽ उषाभ्यां दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (५०)
रात्रि देव उषा देवी हैं. सरस्वती देवी ने इंद्र देव में बल की स्थापना की. मुंह में
वाणी शक्ति की स्थापना की. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की आंखों में दृष्टि की
स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन के इच्छुक यजमान उस
के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा करें. ( ५० )
देवी जोष्ट्री सरस्वत्यश्विनेन्द्रमवर्धयन्.
श्रोत्रन्न कर्णयोर्यशो जोष्ट्रीभ्यां दधुरिन्द्रियं वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. (५१)
सरस्वती देवी और अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव में जोश बढ़ाया. इंद्र देव का यश
बढ़ाया. दोनों कानों में सुनने की शक्ति स्थापित की. अश्विनीकुमारों ने इंद्र देव की
आंखों में दृष्टि की स्थापना की. इंद्र देव धनधारी हैं. हमारे लिए धन धारें. धन के
इच्छुक यजमान उस के लिए कल्याणकारी यज्ञ करने की कृपा करें. ( ५१ )
२८० - यजुर्वेद