यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 250, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध उन्नीसवां अध्याय
हे अग्नि! आप आकांक्षित, कविगणों से स्तुत व हवि वाहक हैं. आप सुगंधित
हवि को वहन करने की कृपा करें. देवगण प्रीतिपूर्वक इस हवि को ग्रहण करने की
कृपा करें. पितरगण को स्वधामय हवि प्रदान करते हैं. ( ६६ )
ये चेह पितरो ये च नेह याँश्च विद्म याँ २ उ च न प्रविद्म.
त्वं वेत्थ यति ते जातवेदः स्वधाभिर्यज्ञ १४ सुकृतं जुषस्व.. (६७)
जो हमारे पितर यहां विराजमान हैं और जो यहां नहीं हैं, जिन पितरों को
हम जानते हैं और जिन को नहीं जानते हैं, हे सर्वज्ञ अग्नि! आप उन्हें जानिए.
आप स्वधापूर्वक इस यज्ञ को अच्छी तरह संपादित कीजिए. ( ६७ )
इदं पितृभ्यो नमो अस्त्वद्य ये पूर्वासो य ऽ उपरास ऽ ईयुः.
ये पार्थिवे रजस्या निषत्ता ये वा नून १४ सुवृजनासु विक्षु.. (६८)
पितरों को नमन. जो पितर पूर्व में हुए, जो पितर बाद में हुए, जो पार्थिव हैं,
जो धर्म पालक हैं, उन सभी पितरों को सादर यह हवि प्राप्त हो. ( ६८ )
अधा यथा नः पितरः परासः प्रत्नासो अग्न ऽ ऋतमाशुषाणाः.
शुचीदयन् दीधितिमुक्थशासः क्षामा भिन्दन्तो अरुणीरपव्रन्.. (६९)
हे अग्नि! जैसे हमारे पितरों ने देह से मुक्त हो कर ऋतलोक को पाया, पवित्र
किया, ज्ञान का विस्तार किया, अज्ञान का भेदन किया, हम भी उन की ही तरह
दिव्यलोक को पाएं. ( ६९ )
उशन्तस्त्वा निधीमह्युशन्तः समिधीमहि.
उशन्नुशत ऽ आ वह पितॄन् हविषे अत्तवे.. (७०)
हे अग्नि! आप यहां विराजिए. हम यज्ञ और अर्थ की कामना से समिधा से आप
को प्रज्वलित करते हैं. आप अग्रगामी हैं. आप पितरों को हविग्रहण करने के लिए
बुलाने की कृपा करें. ( ७० )
अपां फेनेन नमुचेः शिर ऽ इन्द्रोदवर्तयः. विश्वा यदजयः स्पृधः.. (७१)
हे इंद्र देव! आप ने जलों के फेन से ही नमुचि के सिर को काट दिया. आप
सभी अजेय शत्रुओं से स्पर्द्धा करने वाले हैं. ( ७१ )
सोमो राजामृत १४ सुत ऽ ऋजीषेणाजहान्मृत्युम्.
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपान १४ शुक्रमन्धस ऽ इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोमृतं मधु.. (७२)
सोम राजा व अमृत हैं. वे हमें मृत्यु से दूर करते हैं. वे यज्ञ से सत्य, बल व
इंद्रियों में इंद्र का सामर्थ्य उपलब्ध कराते हैं. वे यज्ञ से दूध, अमृत व मधु उपलब्ध
कराते हैं. ( ७२ )
२५० - यजुर्वेद