यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 232, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध अठारहवां अध्याय
सविता देव के जन्मने ( उदय होने ) पर अश्विनीकुमारों के बाहुओं से
अभिषिंचन किया जा रहा है. पूषा देव के हाथों से अभिषिंचन किया जा रहा है.
सरस्वती देवी की वाणी से अभिषिंचन किया जा रहा है. नियामक सत्ता के
नियमन से अभिषिंचन किया जा रहा है. अग्नि के साम्राज्य से अभिषिंचन किया
जा रहा है. ( ३७ )
ऋताषाड्ऋतधामाग्निर्गन्धर्वस्तस्यौषधयोप्सरसो मुदो नाम.
स न ऽ इदं ब्रह्म क्षत्रं पातु तस्मै स्वाहा वाट् ताभ्यः स्वाहा.. ( ३८)
अग्नि सत्य से विजय पाते हैं. वे श्रेष्ठ धाम वाले हैं. ओषधियां गंधर्व की
अप्सराएं हैं. ये सभी में मोद ( प्रसन्नता ) का संचार करती हैं. अग्नि इन ब्राह्मणों व
क्षत्रियों के रक्षक हों. उन के लिए यह आहुति समर्पित हैं. उन के लिए स्नेहपूर्वक
आहुति समर्पित है. उन के लिए स्वाहा. ( ३८ )
स ष्हि हितो विश्वसामा सूर्यो गन्धर्वस्तस्य मरीचयोप्सरस ऽ आयुवो नाम.
स न ऽ इदं ब्रह्म क्षत्रं पातु तस्मै स्वाहा वाट् ताभ्यः स्वाहा.. (३९)
सामवेद की सुंदर ऋचाओं से जिन की स्तुति की जाती है, जो दिन और रात
को मिलाते हैं, जिन की किरणें गंधर्व की अप्सराएं हैं, वे हमारी रक्षा करें. वह सूर्य
ब्राह्मणों व क्षत्रियों की रक्षा करें. उन के लिए यह आहुति है. उन के लिए स्वाहा.
उन के लिए स्नेहपूर्वक आहुति अर्पित है. ( ३९ )
सुषुम्णः सूर्यरश्मिश्चन्द्रमा गन्धर्वस्तस्य नक्षत्राण्यप्सरसो भेकुरयो नाम.
स न ऽ इदं ब्रह्म क्षत्रं पातु तस्मै स्वाहा वाट् ताभ्यः स्वाहा.. (४०)
सूर्य सुषमा दायक हैं. चंद्र देव सूर्य की किरणों से प्रकाश पाते हैं. नक्षत्रों की
रश्मियां गंधर्व अप्सराएं हैं. ये चमकीली हैं. ये ब्राह्मणों व क्षत्रियों की रक्षा करें. इन
के लिए आहुति अर्पित है. इन के लिए स्नेहपूर्वक आहुति अर्पित है. इन के लिए
स्वाहा. ( ४० )
इषिरो विश्वव्यचा वातो गन्धर्वस्तस्यापो अप्सरस ऽ ऊर्जा नाम.
स न ऽ इदं ब्रह्म क्षत्रं पातु तस्मै स्वाहा वाट् ताभ्यः स्वाहा.. (४१)
गंधर्व वायु स्वरूप हैं. वे भूमि को धारण करने वाले हैं. यह भूमि सर्वव्यापक
है. वे गंधर्व शीघ्र गमनशील ऊर्जस्वी हैं. उन से निवेदन है कि वे ब्राह्मणों व क्षत्रियों
की रक्षा करें. उन के लिए स्वाहा. जल उन की अप्सराएं हैं. वे हमारी रक्षा करने की
कृपा करें. उन के लिए स्वाहा. ( ४१ )
भुज्युः सुपर्णो यज्ञो गन्धर्वस्तस्य दक्षिणा ऽ अप्सरस स्तावा नाम.
स न ऽ इदं ब्रह्म क्षत्रं पातु तस्मै स्वाहा वाट् ताभ्यः स्वाहा.. (४२)
२३२ - यजुर्वेद