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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 421 में से

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पृष्ठ 188

पूर्वार्ध पंद्रहवां अध्याय
से हवि वहन करते हैं. वे स्वर्गलोक का स्पर्श करते हैं. वे द्युमान व चमकने वाले
हैं. भरणपोषण कर्ता व पवित्र हैं और घृत से विशाल होते हैं. (२७)
त्वामग्ने अङ्गिरसो गुहा हितमन्वविन्दञ्छिश्रियाणं वने वने.
स जायसे मथ्यमानः सहो महत्त्वामाहुः सहसस्पुत्रमङ्गिरः.. (२८)
हे अग्नि! आप को अंगिरा ऋषि ने प्रकट किया. छिपे हुए आप को वनवन में
खोजा और प्रकट किया. अरणि मंथन से आप उत्पन्न होते हैं. आप को सभी महत्ता
वाला बताते हैं. आप शक्तिमान व अंगिरा के पुत्र हैं. (२८)
सखायः सं वः सम्यञ्चमिष ᳪ स्तोमं चाग्नये.
वर्षिष्ठाय क्षितीनामूर्जो नप्त्रे सहस्वते.. (२९)
अग्नि हमारे सखा हैं. वे हमें जल से सींचते हैं. हम उन के लिए स्तोत्र गाते हैं.
वे ज्येष्ठ हैं और पृथ्वी को ऊर्जस्वी बनाते हैं. (२९)
स ᳪ समिध्युवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य ऽ आ.
इडस्पदे समिध्यसे स नो वसून्याभर.. (३०)
अग्नि समिधा से प्रज्वलित किए जाते हैं. वे शक्तिमान, सब के स्वामी व सुख
देने वाले हैं. आप यज्ञवेदी में भलीभांति प्रज्वलित होइए. आप हमें भरपूर धन प्रदान
करने की कृपा कीजिए. (३०)
त्वां चित्रश्रवस्तम हवन्ते विक्षु जन्तवः.
शोचिष्केशं पुरुप्रियाग्ने हव्याय वोढवे.. (३१)
अग्नि अद्भुत व हवि ग्रहण करने वाले हैं. सभी मनुष्यों के लिए अग्नि का
आह्वान करते हैं. आप चमकीले केशों वाले हैं. आप अत्यंत प्रिय हैं. हम आप के
लिए हवि वहन करते हैं. (३१)
एना वो अग्निं नमसोजों नपातमा हुवे.
प्रियं चेतिष्ठमरति ᳪ स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम्.. (३२)
अग्नि प्रिय, इष्ट, हमारे यज्ञ के प्रेरक, सब के दूत व अमर हैं. हम चैतन्य होने
के लिए उन का आह्वान करते हैं. (३२)
विश्वस्य दूतममृतं विश्वस्य दूतममृतम्.
स योजते अरुषा विश्वभोजसा स दुद्रवत्स्वाहुतः... (३३)
आप विश्व के दूत व अमृत स्वरूप हैं. अग्नि यज्ञ से भोजन पाने वाले अपने
श्रेष्ठ घोड़ों को रथ में जोतते हैं. अग्नि ओज सहित द्रुत गति से यज्ञ में पहुंचते
हैं. (३३)
१८४ - यजुर्वेद