यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसातवां अध्याय
सोम की स्तुति १-३ ८३
सोम तथा यजमानों की रक्षा के लिए इंद्र से प्रार्थना ४ ८३
इंद्र का विस्तार ५ ८३-८४
सुभव का स्वयं प्रकाश ६ ८४
वायु की स्तुति ७ ८४
इंद्र और वायु से सोमरस पीने का आग्रह ८ ८४
मित्र और वरुण की स्तुति ९-१० ८४-८५
अश्विनी देवों की उपासना ११ ८५
इंद्र के गुणों का वर्णन १२-१३ ८५
सोम की शक्ति १४ ८५-८६
इंद्र के लिए यज्ञ १५ ८६
प्रसन्नतादायक जल वर्षा १६ ८६
सोम से अनुरोध १७ ८६
श्रेष्ठ संतान और धन के लिए देव प्रार्थना १८ ८६
दिव्य देव १९ ८६-८७
यज्ञ के लिए ग्रहों का आमंत्रण २० ८७
सर्वसंतोष कारक सोमरस २१ ८७
दीर्घ जीवन की कामना से सोमपान २२-२३ ८७-८८
अग्नि की प्रशंसा २४ ८८
ध्रुव नाम से प्रसिद्ध सोम २५-२६ ८८
वर्चस्व की कामना २७-२८ ८८-८९
सर्वव्यापी सोम २९ ८९
सोम का ग्रहण ३०-३२ ८९-९०
विश्वे देव का आह्वान ३३-३४ ९०
सोम की रक्षा के लिए इंद्र व मरुद् देव से प्रार्थना ३५ ९०-९१
इंद्र की स्तुति ३६-३७ ९१
जल बरसाने वाले मरुद्गण ३८ ९१
इंद्र की महानता ३९-४० ९१-९२
सूर्य की सर्वज्ञता ४१ ९२
मित्र देव का वर्णन ४२ ९२
अग्नि की स्तुति ४३-४४ ९२-९३
देवकृपा ४५-४६ ९३
कामना का महत्त्व ४७-४८ ९३