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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 85

( ८४ )
जाली : निराशा ।
चन्द्र का चिह्न : मूर्ख ।
गुरु का चिह्न : साहस के बल पर आगे बढ़ने वाला ।
शनि का चिह्न : अन्धविश्वासी तथा अर्द्ध पागल ।
सूर्य का चिह्न : जुए की प्रवृत्ति
शुक्र का चिह्न : नवीन विचारों की तरफ प्रेरणा ।
मंगल का चिह्न : पागलपन ।
८. राहू-केतु :
एक रेखा : साहस
कई रेखाएं : अत्यन्त क्रोधी
आपस में : उत्तरदायी भावना की कमी ।
कटती हुई
रेखाएं
बिन्दु : हर कार्य में सफलता ।
क्रॉस : मानहानि ।
नक्षत्र : युद्ध सम्बन्धी कार्यों में विशेष सफलता ।
वर्ग : राज्य सम्मान ।
वृत्त : सेना में अत्यन्त उच्च पद प्राप्ति ।
त्रिकोण : अतुलनीय धन प्राप्ति ।
जाली : दरिद्र जीवन ।
सूर्य का चिह्न : कमजोरी
चन्द्र का चिह्न : पागलपन
मंगल का चिह्न : डाकू, हत्यारा
बुध का चिह्न : निम्नस्तरीय कार्यों से धन लाभ ।
गुरु का चिह्न : अधार्मिक ।
शुक्र का चिह्न : निम्नस्तरीय स्त्रियों से प्रेम संपर्क ।
शनि का चिह्न : प्रसिद्ध जाल साज ।
६. हर्षल :
एक रेखा : विशेष सम्मान ।