बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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७१. जिस स्त्री का पेट छोटा तथा कोमल त्वचा बाला हो वह श्रेष्ठ होती है ।
७२. घड़े के समान पेट वाली स्त्री दरिद्री होती है ।
७३. यदि पेट बहुत चौड़ा हो तो वह दुर्भाग्यशाली होती है ।
७४. लम्बे पेट वाली स्त्री ससुर या जेठ का नाश करती है ।
७५. जिसके पेट पर तीन बल या तीन रेखाएं पड़ती हों वह भाग्यवान होती
है ।
७६. जिसके रोम सीधे और पतले हों वह सुख उठाने वाली होती है ।
७७. जिसकी रोम पंक्ति टेढ़ी-मेढ़ी हो वह विधवा होती है ।
७८. जिसका सीना बिना रोम का हो वह अपने पति की प्रिय होती है ।
७९. जिसका सीना विस्तृत हो वह निर्दयी होती है ।
८०. अठारह अंगुल चौड़ा सीना शुभ माना गया है । अर्थात् स्त्री का सीना
छत्तीस अंगुल का होना चाहिए ।
८१. यदि स्तन कठोर गोल तथा दृढ़ हों तो वे शुभ हैं ।
८२. यदि स्तन मोटे तथा सूखे हुए हों तो वे दुख देने वाले होते हैं ।
८३. यदि स्त्री का दाहिना स्तन ऊंचा हो तो सौभाग्यशाली होती है ।
८४. जिस स्त्री के दोनों स्तन दबे हुए हों वह कुलटा होती है ।
८५. जिस स्त्री के स्तनों के अग्र भाग काले तथा गोल हों वह शुभ माना
गया है ।
८६. जिस स्त्री की हंसुली मोटी हो वह ऐश्वर्य भोगी होती है ।
८७. जिसकी हंसुली ढीली-ढाली हो वे दरिद्री होती है ।
८८. यदि स्त्री के कंधे झुके हुए न हों तो शुभ है ।
८९. यदि स्त्री के कंधे टेढ़े मोटे और बाल युक्त हों तो वह विधवा होती है ।
९०. यदि आगे को कुछ झुके हुए और मजबूत हों तो वह आनन्द करती है ।
९१. यदि उसकी भुजाएं कोमल तथा सीधी और रोम रहित हों तो यह शुभ
माना गया है ।
९२. यदि भुजाएं बालों से भरी हुई हों तो वह विधवा होती है ।
९३. जिन स्त्रियों की भुजाएं छोटी हों वे दुख उठाती हैं ।
९४. यदि हथेली लाल तथा छिद्र रहित हो तो वह सौभाग्यशालिनी होती है ।
९५. यदि हथेली बहुत-सी नसों वाली या बहुत अधिक रेखाओं वाली हों तो
दरिद्री होती है ।
९६. यदि नख लाल और उभरे हुए हों तो शुभ है ।
९७. पीले नख दरिद्रता के सूचक हैं ।
९८. नखों पर सफेद बिन्दु कुलटा का संकेत करते हैं ।
९९. जिसकी पीठ झुकी हुई हो वह दुख उठाने वाली होती है ।