बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 326, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३२५ )
४७. चपटी उंगलियों वाली स्त्री नोकर के समान जीवन व्यतीत करने वाली
होती हैं।
४८. यदि पैर की उंगलियों के बीच में दूरी हो तो वह दरिद्री होती है।
४९. जिस स्त्री के मार्ग में चलते समय धूल उड़ती हो वह व्यभिचारिणी
होती है व बदनाम होती है ।
५०. चलते समय जिस स्त्री की सबसे छोटी उंगली भूमि का स्पर्श न करती
हो वह निश्चय ही पर-पुरुष से रत रहती है।
५१. जिस स्त्री की दो उंगलियां पृथ्वी को स्पर्श नहीं करतीं वह पति को
धोखा देती है।
५२. यदि पैर का ऊपर का हिस्सा चिकना कोमल और मांसल होता है वह
सौभाग्यशाली होती है।
५३. यदि स्त्री के टखने गोलाकार हों तो शुभ होते हैं।
५४. यदि ये टखने नीचे की ओर ढीले हों तो दुर्भाग्यसूचक होते हैं।
५५. जिस स्त्री की ऐड़ी चौड़ी हो वह दुर्भाग्यशालिनी होती है।
५६. जिस स्त्री की जंघाएं रोमहीन चिकनी तथा गोल हों वह राज्य-लक्ष्मी
के समान होती है।
५७. जिस स्त्री के दोनों घुटने गोल और मांस युक्त हों वह धनवान होती है।
५८. जिस स्त्री की पिंडलियां हाथी की सूंड के समान हों वे श्रेष्ठ होती हैं।
५९. बड़े-बड़े रोम वाली पिंडली जिस स्त्री के हो वह शीघ्र ही विधवा
होती है।
६०. जिसकी पिंडलियां चपटी होती हैं वे अभाग्यवान होती हैं।
६१. जिनकी पिंडलियों का चर्म कठोर हो वे धनहीन होती हैं।
६२. जिस स्त्री की कमर चौबीस अंगुल की हो वह श्रेष्ठ होती है।
६३. लम्बी तथा चपटी कमर संकट देने वाली होती है।
६४, रोमयुक्त कमर वाली स्त्री विधवा होती है।
६५. जिस स्त्री के नितम्ब चौड़े हों वह भोगी तथा कामी होती है।
६६. यदि नितम्ब गोल कोमल तथा मांसल हों वह शुभ कहा जाता है।
६७. जिस स्त्री की नाभी गहरी तथा रेखाओं से युक्त हो वह सम्पत्ति देने
वाली होती है।
६८. जिसकी नाभी ऊंची तथा मध्य भाग स्पष्ट दिखता हो, ऐसी स्त्री अशुभ-
कारिणी होती हैं ।
६६. जिस स्त्री की पसलियां कोमल और मांसल होती हैं वह सुख उठाने
वाली मानी जाती हैं।
७०. जिस स्त्री की पसलियों पर रोम हों वह बुरे स्वभाव वाली होती है।