बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 323, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३२२ )
४. काली या नीली जीभ वाले व्यक्ति निर्धन होते हैं ।
५. मोटी और एक समान चौड़ी अथवा पीले रंग की जीभ हो तो वह व्यक्ति
मूर्ख होता है ।
६. जिस पुरुष की जीभ नाक को छूती हो वह उच्च कोटि का साधक या
योगी होता है ।
७. लम्बी जीभ वाला व्यक्ति स्पष्टवादी होता है ।
८. चौड़ी जीभ वाला व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खर्च करने वाला होता है ।
९. जिन स्त्रियों की जीभ कोमल, लाल तथा पतली होती है वे सौभाग्यशाली
होती हैं ।
१०. जिन स्त्रियों की जीभ संकीर्ण होती है वे अशुभ कहलाती हैं ।
११. जिस स्त्री की जीभ मोटी हो वह पूर्ण आयु नहीं प्राप्त करती ।
१२. लाल रंग की जीभ रखने वाली स्त्री श्रेष्ठ पति से शादी करती है ।
१३. काली जीभ वाली स्त्री झगड़ालू होती है ।
१४. बहुत अधिक चौड़ी जीभ वाली स्त्री निरन्तर दुख उठाने वाली
होती है ।
हास्य :
१. हंसते समय जिनके दांत बाहर नहीं आते वे उत्तम व्यक्ति होते हैं ।
२. जो व्यक्ति हंसते समय सिर और कंधा फड़काते हैं वे भोगी अथवा पापी
होते हैं ।
३. आंख मूंदकर हंसने वाले व्यक्ति अधार्मिक होते हैं ।
४. जिसका मुख हमेशा मुस्कराता रहता है वह जीवन में निरन्तर उन्नति
करता रहता है ।
५. जिस स्त्री के हंसते समय दांत न दिखाई पड़ें और थोड़ा-सा मुह खुले वह
स्त्री सौभाग्यशाली होती है ।
६. यदि हंसते समय स्त्री बार-बार कांपती हो या जोरों से खिलखिलाती
हो वह रसिक मिजाज की तथा पर पुरुष से सम्बन्ध रखने वाली होती है ।
७. जिस स्त्री के हंसते समय गाल में गड्ढे पड़ते हों वह पर पुरुष की इच्छा
रखने वाली होती है ।
स्वर : (स्त्रियों के लिए)
१. बोलते समय जिस स्त्री का स्वर वीणा के समान हो वह श्रेष्ठ होती है ।
२. कोकिल-सा स्वर वाली भाग्यशाली स्त्री मानी जाती है ।