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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 350 में से

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पृष्ठ 249

( २४८ )
कलह योग :
परिभाषा : यदि दोनों हाथों में चन्द्र पर्वत जरूरत
से ज्यादा उभरे हुए हों तथा उस पर वृत के चिह्न हों तो कलह
योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसका पूरा
जीवन कलह में ही व्यतीत होता है और कलह से ही दुखी
होकर उसकी मृत्यु होती है ।
उन्माद योग :
कलह योग
परिभाषा : यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का चिह्न हो
तथा सूर्य रेखा उस त्रिकोण को काटती हो तो उन्माद योग
होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
जरूरत से ज्यादा बोलने वाला गप्पें लगाने वाला तथा बकवादी
होता है ।
उन्माद
कुष्ठ रोग योग :
परिभाषा : यदि हथेली में मंगल और बुध रेखाएं मिल
कर मणिबन्ध तक जाती हों तो यह योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह कुष्ट रोग
से पीड़ित रहता है ।
टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योगों को
भी कुष्ट रोग योग माना है :
१. यदि चन्द्रमा तथा हर्षल का सम्बन्ध हो ।
२. यदि हथेली के मध्य में दो त्रिकोण हों तथा आपस
में एक दूसरे को काटते हों ।
कुष्ट रोग योग
कुष्ट रोग एक भयानक रोग है इसके होने पर पूरे
शरीर में सफेद-सफेद दाग पड़ जाते हैं । उसका शरीर बदरंग हो जाता है तथा घाव
सड़ने से पीप पड़ जाती है ।