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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 248, कुल 350 में से

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पृष्ठ 248

( २४७ )
चांडाल योग :
परिभाषा : यदि हथेली में गुरु और राहू की रेखाएं
परस्पर मिलती हों तो चांडाल योग होता है ।
फल : इस योग में उत्पन्न व्यक्ति भाग्यहीन होता है ।
वह आजीविका के लिये बहुत अधिक संघर्ष करता है । मन्द
बुद्धि का ऐसा बालक निरन्तर कठोर संघर्षों में ही जीवित
रहता है ।
चांडाल योग
व्रण योग :
परिभाषा : यदि मंगल रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो
तथा उसके बीच में सफेद बिन्दु हो तो व्रण योग होता है ।
फल : व्रण योग में उत्पन्न व्यक्ति की मृत्यु घावों के
सड़ने से होती है ।
व्रण योग
गल रोग योग :
परिभाषा : यदि चन्द्र पर्वत दबा हुआ हो तथा उस पर
जाली-सी हो, तो गल रोग योग होता है ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह
जीवन भर गले के रोग से पीड़ित रहता है ।
लिंगच्छेदन योग :
गलरोग योग
परिभाषा : यदि बुध रेखा तथा राहू रेखा का सम्बन्ध
हो तथा सम्बन्ध के स्थान पर काला चिह्न हो तो यह योग
होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उस व्यक्ति
का लिंग या तो किसी वजनी वस्तु से कुचल जाता है या व्यक्ति
स्वयं अपने लिंग को काट देता है ।
लिंगच्छेदन योग