बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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नेत्रनाश योग :
परिभाषा : यदि राहू रेखा तथा चन्द्र रेखा का सम्बन्ध
हो तो नेत्र नाश योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसकी आँखें
कमजोर रहती हैं तथा वह नेत्र पीड़ा से पीड़ित रहता है ।
टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योगों को भी
नेत्र नाश योग माना है :
१. यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का चिन्ह हो ।
२. यदि सूर्य रेखा तथा चन्द्र रेखा आपस में मिलकर
गुच्छा बनाती हों ।
नेत्र नाश योग
३. यदि सूर्य रेखा बिल्कुल कमजोर हो ।
४. यदि हथेली में चन्द्र रेखा का अभाव हो ।
५. यदि सूर्य पर्वत अपने स्थान से खिसककर शनि पर्वत से मिल गया हो ।
६. यदि चन्द्र पर्वत हथेली के बाहर की ओर बढ़ रहा हो ।
७. यदि चन्द्र रेखा पर दो त्रिभुज हों ।
८. यदि सूर्य रेखा अनामिका के दूसरे पौर तक पहुंचती हो ।
६. यदि हथेली के मध्य में लाल धब्बा हो ।
अंध योग :
परिभाषा : यदि हथेली में बुध एवं चन्द्र पर्वत का
अभाव हो तो अंध योग होता है ।
फल : अंध योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अंधा
होता है ।
टिप्पणी : विद्वानों ने निम्नलिखित योग भी अंध योग
माने हैं :
अंध योग
१. यदि सूर्य रेखा पर क्रॉस का चिन्ह हो ।
२. यदि सूर्य रेखा मंगल पर्वत तक जाती हो और
अन्त में बिन्दु हो ।
३. यदि चन्द्र रेखा मुड़कर मणिबन्ध तक पहुंचती हो ।
४. यदि मंगल रेखा हथेली के दूसरी तरफ जा रही हो ।
५. यदि राहू रेखा का सम्बन्ध मंगल रेखा से हो गया हो ।
६. यदि केतु पर्वत तथा चन्द्र पर्वत में लाल बिन्दु हो ।