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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 245, कुल 350 में से

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पृष्ठ 245

( २४४ )
कूबड़ांग योग :
परिभाषा : यदि शनि रेखा चन्द्र रेखा तथा राहू रेखा
मिलकर त्रिकोण का चिन्ह बनाते हों तो कूबड़ योग होता है ।
फल : कूबड़ योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति की पीठ
बाहर निकल जाती है और उसका सीना अन्दर की ओर धंस
जाता है ।
कूबड़ योग

एकपाद योग :
परिभाषा : एकपाद योग उस व्यक्ति के हाथ में होता
है जिसमें स्वास्थ्य रेखा पर त्रिकोण हो तथा उस त्रिकोण से
कोई रेखा प्रारम्भ होकर चन्द्र पर्वत तक पहुंचती हो ।
फल : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति एक पैर से
लंगड़ा होता है ।
एकपाद योग

जड़ योग :
परिभाषा : यदि चन्द्र पर्वत पर बहुत अधिक धब्बे,
बिन्दु और आड़ी तिरछी रेखाएं हों तो जड़ योग होता है ।
फल : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति बहरा
होता है ।
जड़ योग