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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 350 में से

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पृष्ठ 242

( २४१ )
३. यदि जीवन रेखा बाल की तरह पतली तथा अस्पष्ट हो ।
४. यदि जीवन रेखा का रंग पीलापन लिए हुए हो ।
५. यदि जीवन रेखा पर धब्बे का चिन्ह हो ।
६. यदि जीवन रेखा का प्रारम्भ गुच्छे के समान हो ।
७. यदि जीवन रेखा के प्रारम्भ में दो रेखाएं बंटी हुई हों ।
८. यदि जीवन रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो ।
६. यदि जीवन रेखा शुक्र के क्षेत्र में धंसी हुई हो ।
१०. यदि हथेली में जीवन रेखा अत्यन्त गहरी और चौड़ी हो :
११. यदि जीवन रेखा हथेली में बहुत छोटी हो ।
१२. यदि जीवन रेखा अपने उद्गम स्थान से प्रारम्भ होकर मणिबन्ध के दूसरे
पौर तक पहुंच गई हो ।
१३. यदि चन्द्र पर्वत पर त्रिकोण का चिन्ह हो ।
१४. यदि चन्द्र पर्वत पर एक से अधिक धब्बे हों ।
१५. यदि चन्द्र रेखा पर त्रिकोण हो ।
१६. यदि चन्द्र रेखा आगे बढ़कर जीवन रेखा को काटती हुई शुक्र पर्वत तक
पहुंचती हो ।
१७. यदि अनामिका के तीसरे पौर पर तारे का चिह्न हो ।
१८. यदि स्वास्थ्य रेखा कई जगह से कटी हुई हो ।
१६. यदि बुध पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह हो ।
२०. यदि जीवन रेखा तथा स्वास्थ्य रेखा जंजीरदार हो ।
२१. यदि स्वास्थ्य रेखा पर दो त्रिकोण के चिन्ह हों ।
ऊपर लिखे २१ योग भी अस्वाभाविक मृत्यु योग ही कहलाते हैं । यहां पर
अस्वाभाविक मृत्यु से मेरा तात्पर्य निम्नलिखित प्रकार से है।
१. जंगल में भटक कर भूख प्यास से पीड़ित होकर मृत्यु प्राप्त करना ।
२. पशुओं के पैरों से कुचल जाने के कारण ।
३. पानी में डूबने से ।
४. सूलपात से ।
५. आपसी कलह से युद्ध होने पर ।
६. जेल में रहने से ।
७. किसी छूत की बीमारी से ।
८. मकान के नीचे दब जाने से ।
६. जंगल में रास्ता भटक जाने के कारण ।
१०. वृक्ष से गिर जाने के कारण ।
११. किसी बन्धन या रस्सी से ।