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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 350 में से

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पृष्ठ 147

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५६. यदि स्वास्थ्य रेखा तथा हृदय रेखा का मिलन बुध पर्वत के नीचे हो
तो उस व्यक्ति की मृत्यु हार्ट-अटैक से होती है ।
५७. यदि स्वास्थ्य रेखा के साथ में कोई सहायक रेखा भी चल रही हो तो
उस व्यक्ति का स्वास्थ्य अत्यन्त श्रेष्ठ समझना चाहिए ।
५८. यदि स्वास्थ्य रेखा ठीक हो परन्तु नाखूनों पर पीली धारियां हों तो
उस व्यक्ति की असमयिक मृत्यु होती है।
५९. यदि स्वास्थ्य रेखा नीचे से पुष्ट परन्तु ऊपर चलते-चलते क्षीण होती
जाती हो तो व्यक्ति की यौवनकाल में ही मृत्यु हो जाती है ।
६०. यदि स्वास्थ्य रेखा मणिबन्ध से निकल रही हो पर टूटी हुई हो तो उस
व्यक्ति की मृत्यु शीघ्र ही समझनी चाहिए ।
६१. यदि स्वास्थ्य रेखा पर जाली का चिह्न हो तो व्यक्ति पूर्ण आयु नहीं
भोगता ।
६२. यदि जीवन रेखा तथा स्वास्थ्य रेखा का आपस में संबंध हो जाय और
ऊपर तारे का चिह्न हो तो व्यक्ति की मृत्यु यात्रा में होती है ।
६३. यदि जरूरत से ज्यादा लम्बे नाखून हों तो व्यक्ति को स्नायु संबंधी
बीमारी होती है ।
६४. यदि नाखूनों का रंग नीला हो तो व्यक्ति पक्षाघात से पीड़ित रहता है।
यदि नाखून छोटे-छोटे हों और स्वास्थ्य रेखा कटी हुई हो तो व्यक्ति को मिर्गी
का रोग होता है ।
६५. यदि जीवन रेखा कमजोर हो तथा बुध रेखा लहरदार हो तो उसे
गठिया की बीमारी होती है।
६६. उत्तम स्वास्थ्य रेखा ही व्यक्ति के लिये सभी दृष्टियों से सुखदायक कही
जाती है।
हस्तरेखा विशेषज्ञ को स्वास्थ्य रेखा का सावधानी के साथ अध्ययन करना
चाहिए । इस रेखा से भविष्य में हम होने वाली बीमारियों तथा दुर्घटनाओं की जानकारी
पहले से ही कर सकते हैं और इस प्रकार की चेतावनी देकर उसे सावधान कर
सकते हैं।
वस्तुतः स्वास्थ्य रेखा का महत्त्व हथेली में अन्यतम है इसमें कोई दो राय नहीं।