बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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३६. यदि स्वास्थ्य रेखा कहीं पर चमकदार तथा कहीं पर फीकी हो अथवा
टुकड़ों में बंटी हो तो उसका स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर रहता है।
४०. यदि स्वास्थ्य रेखा कमजोर और अत्यन्त पतली हो तो उसके चेहरे पर
सुस्ती बनी रहती है।
४१. यदि स्वास्थ्य रेखा और सूर्य रेखा का परस्पर सम्बन्ध बन गया हो तो
उस व्यक्ति का मस्तिष्क अत्यन्त उर्वर होता है।
४२. यदि इस रेखा के अन्त में क्रॉस हो तथा मस्तिष्क रेखा पर भी क्रॉस का
चिह्न हो तो व्यक्ति जीवन में अन्धा होता है।
४३. यदि स्वास्थ्य रेखा के मार्ग में कहीं पर तिरछी रेखा कटती हो तो
आयु के उस भाग में जबरदस्त एक्सीडेंट (दुर्घटना) होता है।
४४. यदि रेखा पर तारे का चिह्न हो तो उसे जीवन में परिवार का सहयोग
नहीं मिलता।
४५. यदि स्वास्थ्य रेखा के आस-पास क्रॉस का चिह्न हो तो उसके जीवन
में कई बार दुर्घटनाएं घटित होती हैं।
४६. यदि राहू क्षेत्र पर गुजरते समय स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिह्न हो
तो ऐसा व्यक्ति टी० बी० के रोग से पीड़ित रहता है।
४७. यदि मस्तिष्क रेखा पर द्वीप का चिह्न हो और उस द्वीप के ऊपर से
होकर स्वास्थ्य रेखा गुजर रही हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य जीवन में अत्यन्त
कमजोर रहेगा।
४८ यदि भाग्य रेखा कटी हुई हो तथा स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिह्न हो
तो व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से पीड़ित रहता है।
४६. यदि स्वास्थ्य रेखा हथेली के अन्दर धंसी हुई सी हो तो उसे गुप्त रोग
रहते हैं।
५०. स्वास्थ्य रेखा पर क्रॉस स्वास्थ्य की हानि की ओर ही संकेत करते हैं।
५१. यदि स्वास्थ्य रेखा पर नक्षत्र हों तो व्यक्ति को पारिवारिक सुख नहीं
मिलता।
५२. यदि बुध रेखा तथा प्रणय रेखा आपस में मिली हुई हों तो उस व्यक्ति
की पत्नी का स्वास्थ्य जीवन भर कमजोर रहता है ।
५३. यदि दोनों हाथों में स्वास्थ्य रेखा स्पष्ट हो तो वह व्यक्ति कामुक और
भोगी होता है।
५४. यदि स्वास्थ्य रेखा दुहरी हो तो व्यक्ति श्रेष्ठ भाग्य का स्वामी होता है।
५५. यदि दुहरी स्वास्थ्य रेखा सूर्य पर्वत को भी स्पर्श करती हो तो वह
व्यक्ति राजनीति में अत्यन्त श्रेष्ठ पद प्राप्त करता है।