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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 350 में से

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पृष्ठ 120

( ११६ )
यद्यपि ऐसे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा परिश्रमी तथा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले
होते हैं। परन्तु कई बार के प्रयत्नों के बाद ही इनको सामान्यतः सफलता नहीं मिल
पाती। जीवन के मध्य काल तक आते-आते ये व्यक्ति ऊब से जाते हैं।
यद्यपि इन व्यक्तियों के पास उर्वर मस्तिष्क होता है, तथा योजना बद्ध तरीके
से कार्य भी प्रारम्भ करते हैं। परन्तु जितने उत्साह से ये कार्य प्रारम्भ करते हैं उस
कार्य के मध्य में आते-आते उनका जोश या उत्साह ठंडा पड़ जाता है। ऐसे व्यक्ति
जीवन में असफल होने पर चिड़चिड़े हो जाते हैं तथा इनकी प्रकृति संशयालू हो जाती
है। इनके सम्पर्क में जो भी व्यक्ति आता है उन सब पर शक करना इनका स्वभाव
हो जाता है। धीरे-धीरे यह व्यक्ति अपने मित्रों तथा परिचितों से कट जाते हैं तथा
इनमें निराशा की भावना जरूरत से ज्यादा व्याप्त हो जाती है। एक प्रकार से ये
आगे चलकर अपने आपको बेसहारा और पराश्रय-सा अनुभव करते हैं।
अब मैं आगे के पृष्ठों में हृदय रेखा से सम्बन्धित उन तथ्यों को स्पष्ट कर
रहा हूं, जिसके माध्यम से इससे सम्बन्धित फला-फल ज्ञात किया जा सकता है :
१. हृदय रेखा जिस पर्वत के नीचे तक पहुंचती है, उस पर्वत में उससे
सम्बन्धित विशेष गुण स्वतः ही आ जायेंगे उदाहरणार्थ यदि हृदय रेखा अनामिका
के मूल में स्थित सूर्य पर्वत के नीचे जाकर समाप्त होती है तो सूर्य से सम्बन्धित विशेष
गुण प्रसिद्धि, कीर्ति, सम्मान आदि में स्वतः ही वृद्धि का योग बन जायगा।
२. यदि हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा की ओर झुके तो जिस जगह वह मुड़ती
है मस्तिष्क रेखा के उस बिन्दु के समान आयु में मस्तिष्क का पूर्ण विकास होता है।
३. यदि यह रेखा आगे चलकर मस्तिष्क रेखा से पूर्णतः मिल जाती है, तो वह
अपने दिमाग में कुछ नहीं सोचता अपितु दूसरों के कहने के अनुसार कार्य करता है,
और उसके आदेश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर लेता है।
४. यदि हृदय रेखा आगे बढ़कर मस्तिष्क रेखा को काट लेती है, तो दिमाग
अस्त-व्यस्त हो जाता है तथा उस व्यक्ति में निर्णय लेने की पूर्ण क्षमता नहीं होती।
५. यदि हृदय रेखा पर आकर कोई अन्य पतली रेखा मिले तो जिस पर्वत की
तरफ से वह पतली रेखा आती है, उस पर्वत के गुणों का उसके हृदय पर विशेष
प्रभाव रहता है।
६. यदि हृदय रेखा से पतली-पतली छोटी-छोटी रेखाएं मस्तिष्क रेखा की
ओर बढ़ती हों तो ऐसा व्यक्ति जीवन-भर मानसिक चिन्ताओं से परेशान रहता है।
७. यदि हृदय रेखा कई जगह टूट-फूट जाती है तो वह व्यक्ति हृदय रेखा का
धिकार होता है।