विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ
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पृ० पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
२४० १२ प्रमाण प्रणाम
२४६ २३ अक्षर अक्षर ५
२५४ २० पारण पाटण
२५५ २ कमी कभी
२५६ १६ बनाया बन गया
२५८ २५ आवेगा जावेगा
२६१ १० पृश्थी पृथ्वी
२६३ १७ (शीर्षक होगा)— अवन्ती देशस्य
अभिनंदन देव
२६७ ६ तथा गणधर तथा ८४ गणधर
२६७ ८ शान्तिजी शान्तिनाथ जी
२६७ २५ पाठ छूटा—हवे चौथा दरवाजा बाहरें
श्रीरामपोल छे तिहा मुनि जाली मयाली
उव्याली छे पर्वतमाही कोरी छे तिहां
देवी की चौकी छे ।
२६८ ५ माडवा भाडवा
२६८ ८ छेटी घेटी
२६८ ९ नहीं नदी
२६८ १८ को रेंशामलीया कोरे शामलीया
२६९ ६ जमगी जमणी
२६९ ७ देवली देवल १
२६९ २२ रू रा
२६९ २५ वरवाडी वावाडी
२६९ २५ पोयानि पो पानी
२७० ४ खत्री छत्री
२७० १२ सादे साये