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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 436

( ३५३ )
पृ० पंक्ति अशुद्ध शुद्ध
५४ १५ कोरा कोश
५५ २० को के
५६ ६ भो भी
६३ १० दुग्घ दुग्ध
६३ ११ यहाँ वहाँ
६५ ८ देवशर्मा इन्द्रशर्मा
६५ ९ आस्तिक अस्थि
६७ १२ प्रवल का फिर प्रवल काफिर
६७ २३ आसावाल्ली आसावल्ली
७० २३ की हो की जय हो
७२ १ मञ्जुला मञ्जुल
७६ १८ नमर नगर
८१ २१–२२ दुर्विग्ध दुर्विदग्ध
८१ २६ श्राद्ध श्रद्धा
८३ १९ सामन्ताद सामन्तादि
९० ५ कई रुद्र
९२ १७ अपौत्र प्रपौत्र
९४ १ मन्त्र मल्ल
९४ ७ ७ श्रीसोम D (अधिक है)
९४ १५ जयन्तर जयन्त
९५ २३ भवोद्योत भावोद्योत
९९ २७ ताम्बूर्लाद ताम्बूलादि
१०० १४ ध्रोव्य ध्रौव्य
१०१ १३ मुक्ल शुक्ल
१०१ १७ अनकवाला
१०२ ४ दाहिन दाहिम