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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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विशेष नामसूची ३३७
-फ-
फल्गुश्री (आर्या) ९१
फलवृद्धि १०४, २४०, २४३
फलोदी १९४, २१८
फलवृद्धि (देवी) २४०
फलवृद्धि पार्श्वनाथ कल्प २४३
-व-
वल ९५
वल (मातंग ऋषि) १६४
वल (विप्र) १७०
वलदेव २४, ९५
वलमित्र ८८
वली ९५
वप्पभट्टिसूरि ४०, ४१
वहल (विप्र) ७७
वहिर्मुख १६७
वहुलावन ४१
वाणगंगा (नदी) ७२
वाणार्जुन -५९
वाराणसी २४३
वाणासुर ११६
(वाल) मुखराय ११५
वालो ७०
वाहड देव ४९
वाहुवली (गिरि) १