विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविशेष नामसूची ३३५
पद्मपुर ११७ पादलिप्ताचार्य ३, ८, ९, ११, २६,
पद्मावती (देवी) २३, ३१, ३२, २६, २१८, २३७
११६, १७४, १९१, २२१, पादलिप्तपुर २३७
२२४, २३२, २३६, २४२ पाली १९५
पालीताना ५, ५६, १२३
पद्मावती (रानी) १४७ पावागढ
पद्मासन ११७ पावापुरी ५६, ५७, २७, ७६, १००
पद्मिनीखड (नगर) ४५ पालक (राजा) ८८ १६०
पद्मोत्तर राजा ९८ पालित (श्रावक) १४९
पत्तन ११३, १७९ पार्वती (प्रतिमा) १८
पणियभूमि ७७ पार्श्वनाथ ५, १४, २२, २३, २१,
पद्मद्रह २६, २७, २८, ३०, ३१, ३९, ४०,
पद्मनाभ २, ३ ५६, ५७, ५८, १०३, ११४, ११६,
पद्मप्रभ (जिन) १९३ ११७, १२१, १२३, १२६, १०७,
१४८, १६१, १६२, १६४, १६८,
पर्यूषण कल्प (सूत्र) २१६ १७४, १७६, १७७, १८०, १८६,
परमर्दि (राजा) १२० १८७, १८८, १९०, १९१, १९४,
परमार ३५ २२५, २३४, २३५, २३६, २३७,
परशुराम ६१ २३९, २४०, २४१, २४३
पर्वतक ५७ पार्श्वनाथ वाटिका ५४
पल्लीवाल (वंश) १२० पार्श्व यक्ष २३
पाटलानगर १९४ पिंडि कुडिमराज २२४
पाटलीपुत्र ८९, १५०, १५५, १५८ पिठर राय ११२
पाडलिपुर ७६ पीठाजा देवी १४४
पाताल लंका १९४ पुक्खल विजय
पाताल लिंग १९४, ७३ पुष्कलि श्रावक ५९
पारकर देश १९२ पूर्ण राजा ८२
पारेत जनपद १८३ पुण्यपाल राजा ७८