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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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३२२ विविध तीर्थ-कल्प
अन्निकापुत्र(आचार्य) १५१,१५२ अरनाथजिन ६०,१७८,१७०,१९४
अनुपमा सर ८ अरिष्ट (भावी चक्रवर्ती) ९४
अनुपमा देवी १८० अरिष्टनेमि ११३,११४,११५,
अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ १९५,२३६ १९२
आन्ध्रदेश २२१ अरुणा (नदी) ११७
अपराजित (प्रतिवासुदेव) ९४ अर्कस्थल ९
अभयकुमार ५१ अर्बुद कल्प ३६
अभयकीर्त्ति १२९ अर्बुदगिरि (आबू) ३३,३५,३६,
अभयदेवसूरि (हर्षपुरीय) १०५ १८१
अभयदेवसूरि (नवांगी अल्लविय (वंग) १०३
वृत्तिकार) २७,२९,२३८,२३९ अल्लाउद्दीन (सुलतान) ६७,६८,
अभया (रानी) १८४,१५६ ११५,१५९
अभिनंदन (जिन) २४,१७, अल्लावपुर २१५
१२८,२०४ अवन्ती [देश] ६०,१२७
अमम ९३ अवन्ती (नगर,पति) १३०,१३१,
अमर ९४ १८९
अमलवाहन ९४ अवलोकन (शिखर) ११,२१,
अमृत गंगा १६३ १४,१८
अबड मन्त्री ४९ अशोकचन्द्र १४७
अवा, अविका (कोहडी), अशोकश्री (मौर्य) १५५
अविणि १५,४१,१६,६५,३१, अश्वमित्र ७२,११२
६१,१०७,११५,१२५,१९१, अश्वसेन (राजा) ५१,१६२
२१२,२१७,२४४,२४५, अश्वावबोध (तीर्थ) ४४,४६,४९
२३६,२४८ अष्टापद गिरि ५,७,१४,६८,
अविकाश्रम १८ ६९,७०,५४,७१,१४९,
अयोध्या (नगरी) ४,५३,२०५, १८३,१९५
१६५,१९३,१९४,१२६ अष्टोत्तरशत कूट १
असिकुण्ड (तीर्थ) ४१