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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 373

२९० विविध तीर्थ-कल्प
१३ धात के १, माता चक्रेश्वरी पाषाण १ दादाजी का पगत्या
१ क्षेत्रपाल १। तपा को उपासरो मूलनायक पदमप्रभु जी विंव
पाषाण १५ धात के १२ रतन की प्रतिमा १ संभूनाथ जी, विंव
पाषाण के ७ धात के २, (रस) उपरा विजामती का मूलनायक
ऋषभदेव जी धात के विंव १, धात की देवी १ श्री शांतिनाथ जी
देहरा मे विंव पाषाण के ३१ धात के ३५, रतन की प्रतिमा ३
सिद्धचक्र जी ३ उपर वीस तीर्थंकर के पगल्ये, ऋषभदेव जी के
पगले चौवीसी के पगले दादाजी के पगल्ये १७ कुथुनाथ विंव
पाषाण के ६ धात के ३।
गाँव नोलाई देवरो १ चरण ५, आदी सरजी पारसनाथ जी
मांहावीर जी दादाजी गौतम स्वामी का ॥९०॥ बंगलोसर १
देहरो १ विंव पाषाणको १ छै धात का विंव ७।
वगलक से कोस १ अयोध्या छै। देहरो १ आदिनाथ जी रो छै
नामे चरण १० आदि सर जी का १ पार्श्वनाथ जी का, महावीर
स्वामी का ३, गौतम स्वामी का ४, श्रीमन्धर स्वामी का, गर्भ
कल्याण जन्म कल्याण, तप कल्याण, ज्ञान कल्याण। दादाजी
कौ चरण।
बनारस मे देवरो १ भेलुपुर मे नेमनाथ जी को, पाषाण का
बिंव ११ धात का विंव ९।
भदाणी जी रो देवरो १ बिंव ३ पाषाण का धात का ७।
सिंगपुरी मे देवरो १ चरण ५ ऋषभदेव जी का गरभ कलाण
जनम कल्याण चवदे सपना केवल ज्ञान, देवरो कुशलाजी रो
वणायो, पच तीरथ का सहस्रफणा पार्श्वनाथ पाट १ बिंव ९६।
पार्श्वनाथ बिंव २७ साँवला पार्श्वनाथ बिंव ५ सुपार्श्वनाथ जी
बिंव ५ चिंतामण पार्श्वनाथ जी बिंव १७, मुनीलाल क देवरो १,
चिंतामण पार्श्वनाथ जी विंव १ पाषाण का धात का ११।