विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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श्री तारंगा जी कोस १२ वारा दिन पांच ५ रह्या। पालनपुर
कोस पचीस २५ दिन रह्या १२। श्री आबू जी कोस बतीस ३२
दिन बारा रह्या १२। सिरोही कोस पचीस २५ दिन छ ६। गाँव
घणैरो कोस पचीस २५ दिन आठ रह्या। उदयपुर कोस २० दिन
बतीस रह्या। श्री धुलेवा केसरयानाथ कोस १६ दिन आठ ८।
श्री मोडवासो कोस पच्याणवे ९५ दिन ५२ वावन। भावनगर
वदर कोस पच्याणवे ९५ दिन बावीस रह्या। सिद्धाचलजी कोस
बावीस २२ दिन २० रह्या। पोरपाहण कोस १२५ एक सौ पचीस,
मास साडा ३।। तीन रह्या। पालनपुर कोस पनरा १५ दिन तीस
रह्या। गाँव नादियो सीरोई पासि पाली आया १०१ एक सौ एक
दिन बतीस। जोधपुर कोस १८ अठारा दिन सात ७ रह्या।
जेसलमेर कोस ९५ पच्याणवे, मास १। सवा एक। बीकानेर
कोस ९० निबे दिन १५ पनरा। सवाई जैपुर कोस पच्याणवें ९५,
दिन तीस रह्या ३०।
सवाई जैपुर की देहरा की याददास्ती—
१ प्रथम पचायती ७ मूलनायक सुपार्श्वनाथ जी धात के विंव
१९ पाषाण के विंव ५, २ श्री महावीर जी के देहरा मे पाषाण के
विंव ५, धातके विंव २, चूतरी ३ मे, ३ गोडीपार्श्वनाथ, च्यार
पाषाण के धात के २०, चरबरी १ नेमनाथ पाषण की चौबीसी ५
विंव ९ धातु के विंव १५, जमली विंव ७९, क्षेत्रपाल १, काठ का
नदीश्वर देहरै ५२, देहरा १ आसवाल का तपैगछ मूलनायक ५
सुमतिनाथ विंव पाषाण के ४, धातु के १८, धात के चौमुख २
चव े १, ऋषभदेवजी की पाषाण के विंव ४, धात के विंव ११,
पट १ का धात को सेत्रुजै जी को, परमेष्ठी नवकार को, सिंघासण
१ तिस ऊपर पगले उपासरा विजामती का देहरासर मूलनायक
ऋषभदेव जी पाषाण के विंव ६ धात के विंव १७। उपासरा