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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 277

१९४ विविध तीर्थ-कल्प
१४ मथुरा मे यमुना-ह्रद मे, द्वारिका मे समुद्र मे, और नाक-
पाणि मे श्री अनन्तनाथ भगवान हैं ।
१५ अयोध्या के समीप रत्नवाहपुर मे नागराजपूजित श्री
धर्मनाथ भगवान हैं ।
१६ किष्किन्धा, लका, पाताललका और त्रिकूटगिरि पर श्री
शान्तिनाथ भगवान हैं ।
१७ १८ गगा यमुना के वेणी सगम पर श्री कुन्थुनाथ—श्री
अरनाथ भगवान है ।
१९ श्रीपर्वत पर श्री मल्लिनाथ हैं ।
२० भृगुपत्तन—भरोच मे अनर्घ्य रत्नचूड श्री मुनिसुव्रत हैं ।
प्रतिष्ठानपुर—अयोध्या, विन्ध्याचल मे माणिक्य दडक मे श्री
मुनि सुव्रत भगवान हैं ।
२१ अयोध्या मे मोक्ष तीर्थ मे श्री नमिनाथ हैं ।
२२ सौरीपुर के शख-जिनालय मे, पाटला नगर मे, मथुरा,
द्वारिका, सिंहपुर, स्तम्भ तीर्थ मे पाताललिंग नामक श्री नेमि-
नाथ भगवान हैं ।
२३ अजाहरा मे नवविधि पार्श्वनाथ, स्तम्भन मे भवभयहर
पार्श्वनाथ, फलौदी मे विश्वकल्पलता श्री पार्श्वनाथ, करहेडा में
उपसर्गहर पार्श्वनाथ, अहिछत्रा में त्रिभुवनभानु पार्श्वनाथ, कलि-
कुण्ड और नागह्रद में श्री पार्श्वनाथ, कुवकुटेश्वर मे विश्वगज
पार्श्वनाथ । माहेन्द्र पर्वत पर छाया पार्श्वनाथ, ओकार पर्वत पर
-सहस्रफणा पार्श्वनाथ, वाराणसी मे दण्डखात मे भव्य पुष्कग-
वर्त्तक पार्श्व, महाकाल के अन्तर मे पातालचक्रवर्ती पार्श्व,
मथुरा मे कल्पद्रुम पार्श्व, चम्पा मे अशोकपार्श्व, मलयगिरि पर
श्री पार्श्वनाथ भगवान हैं ।