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सर्वकोश
विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

Viveka Chudamani with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished153 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 153 में से

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पृष्ठ 35

३८ विवेक-चूडामणि
अहंकारसे लेकर देहपर्यन्त और सुख आदि समस्त विषय जिस
नित्यज्ञानस्वरूपके द्वारा घटके समान जाने जाते हैं।
एषोऽन्तरात्मा पुरुषः पुराणो
निरन्तराखण्डसुखानुभूतिः ।
सदैकरूपः प्रतिबोधमात्रो
येनेषिता वागसवश्चरन्ति ॥ १३३ ॥
यही नित्य अखण्डानन्दानुभवरूप अन्तरात्मा पुराणपुरुष है, जो
सदा एकरूप और बोधमात्र है तथा जिसकी प्रेरणासे वागादि इन्द्रियाँ
और प्राण चलते हैं।
अत्रैव सत्त्वात्मनि धीगुहाया-
मव्याकृताकाश उरुप्रकाशः ।
आकाश उच्चै रविवत्प्रकाशते
स्वतेजसा विश्वमिदं प्रकाशयन् ॥ १३४ ॥
इस सत्त्वात्मा अर्थात् बुद्धिरूप गुहामें स्थित अव्यक्ताकाशके भीतर
एक परमप्रकाशमय आकाश सूर्यके समान अपने तेजसे इस सम्पूर्ण
जगत्को देदीप्यमान करता हुआ बड़ी तीव्रतासे प्रकाशमान हो रहा है।
ज्ञाता मनोऽहङ्कृतिविक्रियाणां
देहेन्द्रियप्राणकृतक्रियाणाम् ।
अयोऽग्निवत्ताननुवर्तमानो
न चेष्टते नो विकरोति किञ्चन ॥ १३५ ॥
वह मन और अहंकाररूप विकारोंका तथा देह, इन्द्रिय और प्राणोंकी
क्रियाओंकां ज्ञाता है। तथा तपाये हुए लोहपिण्डके समान उनका
अनुवर्तन करता हुआ भी न कुछ चेष्टा करता है और न विकारको ही
प्राप्त होता है।
न जायते नो म्रियते न वर्धते
न क्षीयते नो विकरोति नित्यः।