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सर्वकोश
विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

विवेकचूड़ामणि (हिन्दी अनुवाद सहित)

Viveka Chudamani with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished153 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 153 में से

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पृष्ठ 29

३२ विवेक-चूडामणि
है। इस विषयमें श्रुति, प्रत्यक्ष, ऐतिह्य (इतिहास) और अनुमान-प्रमाण
जागृत (मौजूद) हैं।
माया-निरूपण
अव्यक्तनाम्नी परमेशशक्ति-
रनाद्यविद्या त्रिगुणात्मिका परा।
कार्यानुमेया सुधियैव माया
यया जगत्सर्वमिदं प्रसूयते॥११०॥
जो अव्यक्त नामवाली त्रिगुणात्मिका अनादि अविद्या परमेश्वरकी परा
शक्ति है, वही माया है; जिससे यह सारा जगत् उत्पन्न हुआ है। बुद्धिमान्,
जन इसके कार्यसे ही इसका अनुमान करते हैं।
सन्नाप्यसन्नाप्युभयात्मिका नो
भिन्नाप्यभिन्नाप्युभयात्मिका नो।
सङ्गाप्यनङ्गाप्युभयात्मिका नो
महाद्भुतानिर्वचनीयरूपा ॥१११॥
वह न सत् है, न असत् है और न [ सदसत् ] उभयरूप है; न भिन्न है,
न अभिन्न है और न [ भिन्नाभिन्न ] उभयरूप है; न अंगसहित है, न
अंगरहित है और न [ सांगानंग ] उभयात्मिका ही है; किन्तु अत्यन्त अद्भुत
और अनिर्वचनीयरूपा (जो कही न जा सके ऐसी) है।
शुद्धाद्वयब्रह्मविबोधनाश्या
सर्पभ्रमो रज्जुविवेकतो यथा।
रजस्तमः सत्त्वमिति प्रसिद्धा
गुणास्तदीयाः प्रथितैः स्वकार्यैः॥ ११२ ॥
रज्जुके ज्ञानसे सर्प-भ्रमके समान वह अद्वितीय शुद्ध ब्रह्मके ज्ञानसे
ही नष्ट होनेवाली है। अपने-अपने प्रसिद्ध कार्योंके कारण सत्त्व, रज और
तम—ये उसके तीन गुण प्रसिद्ध हैं।