विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
४८० आनन्द मन्दिर
गर्भौँ की स्थिति
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८१
मूढ़ गर्भों की उत्पत्ति चित्र नं० १
३१
४८२ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० २
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८३
चित्र नं० ३
४८४ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ४
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८५
चित्र नं० ५
४८६ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ६
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८७
चित्र
नं०
७
४८८ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ८
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८६
चित्र नं० ९
४६० आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १०
कभी कभी अनियम आहार विहार के कारण तथा रति
क्रिया से गर्भ का बालक योनिमार्ग में आकर अटक जाता है।
इसलिये प्रसव के समय बड़ा कष्ट होता है।
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६१
चित्र नं० ११
गर्भवती के कुपथ्य तथा गर्मी अवस्था मे रतिक्रिया होने के
कारण गर्भ उलट जाता है और प्रसव के समय प्रसव होना
कठिन होजाता है तब काटकर निकाला जाता है इससे जच्चा
और बच्चा दोनो का कभी २ प्राणान्त तक होजाता है ।
४६२ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १२
कभी कभी अनियम से गर्भ के बालक का सिर टेढ़ा तिरछा
हो जाता है इससे गर्भवती को बड़ा कष्ट होता है।
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६३
चित्र नं० १३
गर्भवती स्त्रियो को बडी सावधानी और पथ्य से रहना
चाहिए। प्रसंग से बहुत बचना चाहिये अनियम आहार विहार
तथा इस दशा मे रतिक्रिया होने से गर्भ को अनेक प्रकार से
हानि पहुँचती है।
१६१ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १४
गर्भ का बालक अनियम रतिक्रिया से दबाव पड़ने के
कारण उलटा सुलटा टेढा तिरछा होजाता है।
विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६५
चित्र नं० १५
४६६ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १६
धाय का कर्तव्य है, यदि वह चतुर हुई तो उलटे सुलटे तिरछे
गर्भ को ठीक कर सकती है। देखिये दूसरा भाग।
आनन्द
मन्दिर
उन्नीसवां अध्याय
— ० —
३२
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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६६
गर्भिणी और गर्भ को हानि
पहुंचने का कारण
जो गर्भवती स्त्रियां ऊ चे नीचे स्थान पर चढ़ती उतरती हैं
और बहुधा उकडू बैठा करती हैं जो धमक कर तेजी से चलती
हैं, जो सवारी पर बैठती हैं और जो बहुधा तख्त, चौकी अथवा
पृथ्वी आदि कठोर स्थान पर बैठी रहती है जो एक ही करवट
से बैठी रहती हैं और जो अधोवायु, दिशा, पेशाव आदि वेगों
को रोकती हैं जो कठिन परिश्रम करती है और जो अपनी शक्ति
से अधिक काम करती हैं जो बोझा उठाती हैं, जो गरम वस्तुएं
अधिक सेवन करती हैं, अथवा उपवास अधिक करती हैं ।
ऊपर के इन कारणों से और अधिक कलह चिंता और
शोक से उनका गर्भ पेट मे ही मरजाता है अथवा उलटा तिरछा
टेढ़ा होकर गर्भवती के प्राणों को नष्ट करता है और आप भी
नष्ट होता है ।
अधिक दिन का गर्भ होने से टेढ़ा हो जाने से गर्भिणी को
बड़ा कष्ट पहुंचता है जो गर्भवती स्त्री सदैव चित्त लेटा करती है
उसके गर्भ के बालक को बड़ी भारी हानि पहुंचती है इस कारण
गर्भवती को सब प्रकार से सावधान रहना चाहिये ।
यदि गर्भवती को ऊपर लिखे अनुसार किसी प्रकार का कष्ट
हो जावे तो किसी चतुर दाई को बुलाकर ठीक कराले । इस पुस्तक
के दूसरे भाग मे यह विषय भी विस्तार पूर्वक समझाया जावेगा ।