विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 686, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६६
गर्भिणी और गर्भ को हानि
पहुंचने का कारण
जो गर्भवती स्त्रियां ऊ चे नीचे स्थान पर चढ़ती उतरती हैं
और बहुधा उकडू बैठा करती हैं जो धमक कर तेजी से चलती
हैं, जो सवारी पर बैठती हैं और जो बहुधा तख्त, चौकी अथवा
पृथ्वी आदि कठोर स्थान पर बैठी रहती है जो एक ही करवट
से बैठी रहती हैं और जो अधोवायु, दिशा, पेशाव आदि वेगों
को रोकती हैं जो कठिन परिश्रम करती है और जो अपनी शक्ति
से अधिक काम करती हैं जो बोझा उठाती हैं, जो गरम वस्तुएं
अधिक सेवन करती हैं, अथवा उपवास अधिक करती हैं ।
ऊपर के इन कारणों से और अधिक कलह चिंता और
शोक से उनका गर्भ पेट मे ही मरजाता है अथवा उलटा तिरछा
टेढ़ा होकर गर्भवती के प्राणों को नष्ट करता है और आप भी
नष्ट होता है ।
अधिक दिन का गर्भ होने से टेढ़ा हो जाने से गर्भिणी को
बड़ा कष्ट पहुंचता है जो गर्भवती स्त्री सदैव चित्त लेटा करती है
उसके गर्भ के बालक को बड़ी भारी हानि पहुंचती है इस कारण
गर्भवती को सब प्रकार से सावधान रहना चाहिये ।
यदि गर्भवती को ऊपर लिखे अनुसार किसी प्रकार का कष्ट
हो जावे तो किसी चतुर दाई को बुलाकर ठीक कराले । इस पुस्तक
के दूसरे भाग मे यह विषय भी विस्तार पूर्वक समझाया जावेगा ।