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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७७


वाल्यावस्था में विवाह होने से पति के घर जाते ही मासिक-
धर्म होना और ऋतु के दिनों में प्रसग होने से गर्भाशय पर
दवाव पड़ने के कारण गर्भाशय खराव होजाता है इसलिये
मासिकधर्म भी ठीक नहीं होता और स्त्री वन्ध्या होजाती है ।

बन्ध्या स्त्रियों का शर्त्तिया इलाज

आदि वन्ध्या को छोड़कर जिसके गर्भाशय होता ही नहीं
वाकी सव प्रकार की खरावियों वाली वन्ध्या स्त्रियां मेरे देशी
इलाज से आराम होगई हैं और हजारों सन्तान हीन स्त्रियां
सन्तानवती होगई हैं इसलिये,—

सन्तानहीन स्त्रियां निराश न हों

किसी स्त्री के किसी कारण से भी सन्तान न होती हो
अथवा गर्भ कभी रहा ही न हो या एक ही वालक होकर फिर
गर्भ धारण न हुआ हो, कुछ भी शिकायत हो तो इलाहावाद
लाकर मुझे दिखलावें । आदि वन्ध्या को छोड़कर वाकी सव
वन्ध्याओं का इलाज कर दिया जायगा सन्तान होने लगेगी ।

पुरुष रोगियों को सूचना

किसी स्त्री का पति शीघ्रपात, सुस्ती, निर्वलता, शिथिलता,
वीर्य विकार, प्रमेह, नसों की कमजोरी, स्वप्नदोष और नपुंसकता
आदि किसी भी रोग का रोगी हो तो एकवार अपना पूरा हाल
लिखकर भेजे उसका रोग दूर कर दिया जावेगा । २५ पचीस

४७८ आनन्द मन्दिर
वर्षों में लाखों पुरुषो का इलाज उनकी स्त्रियो द्वारा करके आराम
कर दिया गया है।
सब प्रकार की चिट्ठियां गुप्त रक्खी जाती हैं इसलिये संकोच
न कर रोग का पूरा हाल लिखकर फायदा उठाइये।
मूढ़ गर्भोँ की उत्पत्ति
विपरीत आसन से रतिक्रिया करने से गर्भाशय को हानि
पहुँच कर तथा गर्भवती स्त्री से रतिक्रिया करने से गर्भ को हानि
पहुँच कर मूढ़ गर्भोँ की उत्पत्ति होती है। मूट गर्भोँ के कुछ
चित्र दो बच्चे होने के चित्रों के साथ बतलाए गये हैं। यहां पर
नीचे दिए गए चित्रों से पाठक पाठिकाओं की यह भलीभांति समझ
में आजावेगा कि गर्भवती से रतिक्रिया करने से गर्भ की स्थिति
अनेक प्रकार की होजाती है जिसके कारण गर्भ और गर्भवती
दोनों के प्राणान्त तक का समय आजाता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७६
गर्भों की स्थिति

४८० आनन्द मन्दिर
गर्भौँ की स्थिति

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८१
मूढ़ गर्भों की उत्पत्ति चित्र नं० १
३१

४८२ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० २

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८३
चित्र नं० ३

४८४ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ४

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८५
चित्र नं० ५

४८६ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ६

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८७
चित्र
नं०
७

४८८ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० ८

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४८६
चित्र नं० ९

४६० आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १०
कभी कभी अनियम आहार विहार के कारण तथा रति
क्रिया से गर्भ का बालक योनिमार्ग में आकर अटक जाता है।
इसलिये प्रसव के समय बड़ा कष्ट होता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६१
चित्र नं० ११
गर्भवती के कुपथ्य तथा गर्मी अवस्था मे रतिक्रिया होने के
कारण गर्भ उलट जाता है और प्रसव के समय प्रसव होना
कठिन होजाता है तब काटकर निकाला जाता है इससे जच्चा
और बच्चा दोनो का कभी २ प्राणान्त तक होजाता है ।

४६२ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १२
कभी कभी अनियम से गर्भ के बालक का सिर टेढ़ा तिरछा
हो जाता है इससे गर्भवती को बड़ा कष्ट होता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६३
चित्र नं० १३
गर्भवती स्त्रियो को बडी सावधानी और पथ्य से रहना
चाहिए। प्रसंग से बहुत बचना चाहिये अनियम आहार विहार
तथा इस दशा मे रतिक्रिया होने से गर्भ को अनेक प्रकार से
हानि पहुँचती है।

१६१ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १४
गर्भ का बालक अनियम रतिक्रिया से दबाव पड़ने के
कारण उलटा सुलटा टेढा तिरछा होजाता है।

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४६५
चित्र नं० १५

४६६ आनन्द मन्दिर
चित्र नं० १६
धाय का कर्तव्य है, यदि वह चतुर हुई तो उलटे सुलटे तिरछे
गर्भ को ठीक कर सकती है। देखिये दूसरा भाग।