विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवेद शास्त्रों की आज्ञा ४१
उत्तम, आरोग्य और दीर्घ जीवी सन्तान उत्पन्न होने के विषय
में वेद की आज्ञा है.—
सोमो वधूरभवदश्विनास्तामुभा वरा ।
सूर्या यत्पत्ये शंसन्तीं मनसा सविता ददात् ॥
अर्थात्—सुकुमार शुभ गुण युक्त वधू ( पत्नी ) की इच्छा
करनेवाला पति तथा पति की कामना करने वाली भार्या, दोनो
ब्रह्मचर्य से विद्या प्राप्त करे और दोनो श्रेष्ठ समान गुण कर्म स्व-
भाव वाले हो ऐसी जो सूर्य की किरणवत सौन्दर्य गुण युक्त
पति के लिये मन से गुणकीर्तन करने वाली पत्नी है उसको पुरुष
और इसी प्रकार के पुरुष को स्त्री सकल जगत का उत्पन्न करने
वाला परमात्मा देता है अर्थात् बड़े भाग्य से दोनो स्त्री पुरुष
का, जोकि बराबर गुण कर्म स्वभाव वाला हो, जोड़ा मिलता है ।
परमात्मा कहता है.—
इहैव स्तं मा वियौष्टं विश्वमायुर्व्यश्नुतम् ।
क्रीडन्तौ पुत्रैर्नप्तृभिर्मोदमानौ स्वस्तकौ ॥
अर्थात्-हे स्त्री और पुरुष ! मै परमेश्वर आज्ञा देता