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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 657

१७४ आनन्द मन्दिर
का आनन्द बराबर प्राप्त करके सन्तान उत्पन्न करते हैं वे
गर्भ रहने पर ब्रह्मचर्य से रहते हैं।
ऐसी स्त्रियो की जबानी मालूम हुआ है कि उन स्त्रियों को
सम्भोग की बीच में कभी इच्छा नहीं होती। उनकी सन्तान भी
आरोग्य और हृष्ट पुष्ट देखी जाती है।
पति की निर्बलता संभोग और रोग
जिन स्त्रियों के पति निर्बल दुर्बल हैं तथा जिन्हें वीर्य विकार
सुस्ती शीघ्रपात आदि की शिकायत है उनकी स्त्रियां सभोग से
सन्तुष्ट नहीं होती और उन्हें अनेक रोग इस कारण उत्पन्न
होजाते हैं कि पति ने प्रसंग आरम्भ किया और स्त्री की इच्छा
पूर्ण न हुई, पति शीघ्रपात आदि के कारण स्खलित होगया
अथवा पति की सुस्ती के कारण उत्तेजना ठीक न हुई और स्त्री
का रज स्खलित न होकर बीच मे ही रुक गया इससे स्त्री की
जननेन्द्री मे जलन, हिस्ट्रिया, दिलकी धड़कन, चक्कर आना, पेशाब
में जलन, मासिकधर्म की खराबी, प्रदर रोग इत्यादि रोग उत्पन्न
होजाते हैं।
रज को बहाने वाली नसों मे खराबी उत्पन्न होजाती है
मासिकधर्म्म का रक्त कम आने लगता है और वह नसों मे
इकट्ठा हो हो कर गुल्म आदि रोग उत्पन्न करता है। इससे स्त्री
वन्ध्या होजाती है और उसे संभोग की इच्छा बहुत कम होती
है। रोग अधिक बढ़ जाने से सभोग की इच्छा बिलकुल नष्ट
होजाती है।