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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७३
गर्भाधान क्रिया अर्थात् संभोग ठीक
न होने से स्त्रियों का रोगी होना
गर्भाशय से जो नाड़ियां लगीहुई हैं वे स्त्री अंडकोप से स्त्री का
वीर्य (रज) लेजाकर गर्भाशय मे पहुँचाती हैं । पति की निर्वलता,
सुस्ती और शीघ्रपात के कारण रतिक्रिया ठीक न होने से स्त्री के
अंडकोप से चला हुआ वीर्य अर्थात् रज गर्भाशय तक नही पहुँच
सकता, बीच मे ही रुक जाता है ।
इसलिये स्त्री को रति सुख भी प्राप्त नही होता और गर्भ
भी नही रहता तथा अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होजाते हैं ।
प्रेम संभोग और आरोग्यता
पति पत्नी मे प्रेम पूर्वक इच्छा होने पर सभोग हो और उस
सच्ची इच्छा से दोनों सन्तुष्ट और प्रसन्न हों फिर किसी कारण
से गर्भ न रहे तो आरोग्यता प्राप्त होती है । स्त्री को किसी प्रकार
गर्भाशय तथा ऋतु सम्बन्धी रोग नहीं होता और पति पत्नी दोनो
आरोग्य रहते हैं यदि गर्भ रहजावे तो गर्भस्राव व गर्भपात का
भय नही रहता ।
रतिक्रिया ठीक ठीक होने से स्त्रियां अनेक रोगो से बची
रहकर उत्तम सन्तान उत्पन्न करती हैं । मेरे पास ऐसी भी
अनेक स्त्रियां आया करती हैं जिनके पति नियम पूर्वक ऋतु-
स्नान के बाद रतिक्रिया करते है और पति पत्नी दोनो संभोग