विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४७१
तीन छत्ते दिखला रहे हैं ये सब रक्त से भरे हुए हैं जिसे
न० १० के पास वाली लकीर बतलाती है। ये छत्ते रक्त मे तैरते
रहते हैं और गर्भवती के शुद्ध रक्त को खींचकर उस नली मे
लेजाते हैं जिस के द्वारा गर्भ का पालन होता है और बालक
से अशुद्ध रक्त लाकर अशुद्ध रक्त वाली नली को देते हैं।
गर्भ और गर्भाशय के चित्र मे नं० ६—७ ये दो नलियां
हैं जिनके मिलने से नाड़ बना है इन दोनो नलियो द्वारा माता
से शुद्ध रक्त बालक मे और बालक से अशुद्ध रक्त माता मे ले
जाने और लाने का काम होता है।
न० ८ यह वह सबसे भीतरी झिल्ली है जो कि नाड की
दोनो नलियो को लपेटी हुई वच्चे के चारों ओर थैली रूप मे
रहती है अर्थात् इसी थैली मे वच्चा रहता है।
वच्चे की रक्षा और गर्भाशय को हर वक्त कोमल व तर
बनाये रखने के लिये इस थैली मे पानी भरा रहता है। सन्तान
उत्पन्न होने के समय यह थैली फट जाती है तब सब पानी निकल
जाता है।
वह नाल जो वच्चे की नाभि मे लगा रहता है जिसके द्वारा
वच्चे का पोषण होता है इस बालक और खेड़ी वाले दो रंगे
चित्र से भली भांति समझ मे आजावेगा।
इसी प्राकृतिक नियम से माता जो कुछ आहार करती है
उसका परिपाक होकर रस बनता है और रस से रक्त वनकर