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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 653

१४७ आनन्द मन्दिर
बहुतों के गर्भस्राव व गर्भपात होते हैं और बहुतों के मूढ़ गर्भ की
उत्पति होती है ।
चित्र मे नम्बर १ के पास जिस स्थान से लकीर गई है वह
सब चित्र के इस छोर मे उस छोर तक गर्भाशय की दीवार
( हह ) है ।
न० २ के पास जिस स्थान मे लकीर गई है वह गर्भाशय
का एक वह हिस्सा है जो कि गर्भ के साथ ही साथ बढ़ता जाता
है वह बालक की सब से बाहरी भित्ती है। यह गर्भाशय और
बालक के बीच में रहती है इसका काम हैं बालक को गर्भाशय
से मिलाकर माता के हृदय के रक्त को ले जाने और लाने वाली
नलियो को मिलाना ।
न० ३ के पास जिस स्थान से एक लकीर गई है वह गर्भा-
शय मे गर्भवती के शरीर से गर्भ को पोषण करने के लिये शुद्ध
रक्त लाने वाली नली है ।
न० ४ गर्भाशय से बचे को पोषण करके अशुद्ध रक्त माता
के शरीर मे लौटा देने वाली नली जिसके द्वारा बालक से अशुद्ध
रक्त माता से आकर शुद्ध हो फिर दूसरी शुद्ध रक्त लाने वाली नली
द्वारा गर्भ को पोषण करने के लिये लौट जाता है । इस प्रकार
शुद्ध और अशुद्ध रक्त वाली दो नलियां मिलकर नाड़ कहलाता है।
न० ५-७-११ के पास जिन स्थानों से लकीर चली है
यह एक प्रकार की छोटी छोटी नलिया के छत्ते हैं जो रक्त में
तैरते रहते हैं। जो काला स्थान है जिसमे नं० ५-७-११