विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६८ आनन्द मन्दिर
जाते ही वीर्य बहने लगता है तो इससे भी उस पुरुष की स्त्री
रति सुख से वंचित रहती है और उसके गर्भ नहीं रहता ।
यदि संभोग आरम्भ करते ही पुरुष मे सिथिलता आजाती, है
तो भी उसकी स्त्री को रतिसुख नही मिलता और गर्भ नहीं रहता ।
रति सुख का आनन्द
रति सुख का आनन्द उन्ही पति पत्नियों को ठीक मिलता
है जो आरोग्य हैं जो विपरीत रतिक्रिया आसन आदि और
अधिक आनन्द की इच्छा नही रखते। जो पुरुष जीवन रखने के
लिये आहार करते हैं वे ही आरोग्य रहते हैं और जो आहार के
लिये अर्थात् अच्छे अच्छे पदार्थ अधिक स्वादिष्ट पदार्थ खाने के
लिये ही अपना जीवन समझते हैं वे सदैव रोगी रहते हैं जिनकी
जिह्वा अपने काबू मे नही है वे रोगो का घर बने रहते हैं ।
इसी प्रकार जो रति सुख को ही जीवन का आनन्द माने
हुए हैं और अधिक आनन्द के लिये अनियम रति करते हैं। वे भी
रोगो का घर बने हुए है और जो प्राकृतिक नियम के अनुसार
सन्तान के लिये रति सुख के इच्छुक हैं वे दाम्पत्य सुख का
आनन्द प्राप्त करते हैं और उत्तम सन्तान प्राप्त करते हैं।
गर्भवती से रति करने का गर्भ पर
बुरा प्रभाव
जो मूर्ख पति गर्भ रह जाने पर भी गर्भवती से रतिक्रिया
करते हैं उनकी सन्तान दुष्ट स्वभाव रोगी और निर्बल होती है।